स्वच्छता व्यवस्था का अध्ययन कर लौटी नगर परिषद
कचरा प्रबंधन सुधार के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजने की तैयारी
अतिरिक्त वाहन, पीपीपी मॉडल और स्रोत पर कचरा पृथक्करण पर रहेगा जोर
गदग. शहर में फैली गंदगी और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की चुनौतियों के बीच गदग-बेटगेरी नगर परिषद अब देश के सबसे स्वच्छ शहरों में शुमार इंदौर मॉडल को अपनाने की तैयारी में है। हाल ही में नगर परिषद के 42 अधिकारियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों ने मध्य प्रदेश के इंदौर का दौरा कर वहां की आधुनिक कचरा प्रबंधन व्यवस्था का अध्ययन किया। अब इस अनुभव के आधार पर शहर में व्यापक सुधार की योजना बनाई जा रही है।
नगर परिषद का दल 30 जून को इंदौर गया था और 3 जुलाई को लौटकर वहां की व्यवस्थाओं का विस्तृत अध्ययन रिपोर्ट तैयार करने में जुट गया है। अधिकारियों के अनुसार, सरकार को शीघ्र ही सुधार संबंधी प्रस्ताव भेजा जाएगा।
घर-घर कचरा संग्रहण से मिली प्रेरणा
नगर परिषद के अधिकारियों ने बताया कि इंदौर में घर-घर से नियमित कचरा संग्रहण, गीले और सूखे कचरे का स्रोत पर पृथक्करण तथा वैज्ञानिक निस्तारण की प्रभावी व्यवस्था है। इसके लिए पर्याप्त संख्या में कचरा संग्रहण वाहन, प्रशिक्षित कर्मचारी और जनजागरूकता के लिए अलग टीम कार्यरत है।
वहां कचरा प्रसंस्करण तक की पूरी व्यवस्था सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर संचालित की जाती है। सडक़ सफाई और बाजार क्षेत्रों से कचरा संग्रहण के लिए नगर निगम के कर्मचारी कार्य करते हैं, जबकि संचालन एवं रखरखाव के लिए प्रत्येक परिवार से मासिक 90 रुपए शुल्क लिया जाता है।
इंदौर में जीपीएस के माध्यम से कचरा संग्रहण वाहनों की निगरानी की जाती है। लगभग 150 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित कचरा प्रसंस्करण संयंत्र में उत्पादित सीएनजी का उपयोग कचरा वाहनों को चलाने में किया जाता है। शहर के सौंदर्यीकरण के लिए दीवार चित्रों और आकर्षक पेंटिंग का भी व्यापक उपयोग किया गया है।
गदग में भी होंगे सुधार
नगर परिषद के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन के तहत उपलब्ध अनुदान से गदग-बेटगेरी में भी कई सुधार किए जा सकते हैं। इसके लिए 17 अतिरिक्त कचरा संग्रहण वाहनों की खरीद तथा आवश्यकतानुसार अतिरिक्त कर्मचारियों की नियुक्ति का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, ताकि घर-घर गीले और सूखे कचरे का पृथक्करण सुनिश्चित किया जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि शहर में कचरा प्रसंस्करण के लिए पीपीपी मॉडल को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है। निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और एजेंसी का चयन भी कर लिया गया है। परियोजना लागू होने के बाद एजेंसी अपने संसाधनों से कचरे का वैज्ञानिक प्रसंस्करण कर जैविक खाद और आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) का उत्पादन करेगी। नगर परिषद को उम्मीद है कि इससे शहर की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
“स्वच्छ भारत मिशन के तहत मिली सरकारी सहायता का प्रभावी उपयोग किया जाए तो गदग को भी इंदौर की तरह स्वच्छ शहर बनाया जा सकता है।”
–चंद्रु तडसद, नगर परिषद सदस्य
“वर्तमान संसाधनों के आधार पर ठोस कचरा प्रबंधन सुधार का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिसे जल्द ही सरकार को भेजा जाएगा।”
–राजाराम पवार, मुख्याधिकारी (नगर परिषद)
आंकड़ों में गदग-बेटगेरी नगर परिषद
मद — संख्या
कचरा संग्रहण वाहन — 32
स्थायी सफाई कर्मचारी — 121
स्थायी लोडर — 17
कचरा संग्रहण वाहन चालक — 63
आउटसोर्स सफाई कर्मचारी — 92
कचरा फेंकने के ब्लैक स्पॉट — 130
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