रिक्त पद भरने और मौजूदा सरकारी स्कूलों को सुदृढ़ करने की मांग
अनुदानित विद्यालयों के अस्तित्व पर संकट जताया
हुब्बल्ली. विधान परिषद सदस्य बसवराज होरट्टी ने राज्य सरकार से हावेरी जिले के राणेबेन्नूर तालुक के उक्कुंद, असुंडी और कज्जरी गांवों के सरकारी उच्च प्राथमिक विद्यालयों को पीएम श्री कर्नाटक पब्लिक स्कूल के रूप में उन्नत कर आठवीं कक्षा शुरू करने के निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में शिक्षा मंत्री को ज्ञापन सौंपते हुए कहा कि वर्तमान व्यवस्था कर्नाटक पब्लिक स्कूल (केपीएस) की मूल अवधारणा के अनुरूप नहीं है।
केपीएस के मूल नियमों के पालन की मांग
होरट्टी ने कहा कि वर्ष 2018 में शुरू की गई कर्नाटक पब्लिक स्कूल योजना का उद्देश्य एक ही परिसर में पहली कक्षा से लेकर द्वितीय पीयूसी तक की शिक्षा उपलब्ध कराना था। लेकिन वर्तमान में अलग-अलग परिसरों में स्थित विद्यालयों को एकीकृत कर केपीएस घोषित किया जा रहा है, जो सरकारी दिशा-निर्देशों की भावना के विपरीत है।
उन्होंने मांग की कि केवल उन्हीं संस्थानों को केपीएस का दर्जा दिया जाए, जहां प्राथमिक से लेकर पीयूसी तक की सभी कक्षाएं एक ही परिसर में संचालित हों। अलग-अलग स्थानों पर स्थित विद्यालयों के विलय की प्रक्रिया तत्काल रोकी जाए।
अनुदानित स्कूलों पर संकट
उन्होंने कहा कि नए सरकारी उन्नयन से आसपास के निजी अनुदानित एवं सरकारी कन्नड़ विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या घटेगी। इससे कई अनुदानित विद्यालय बंद होने की स्थिति में पहुंच सकते हैं और वहां कार्यरत शिक्षक तथा कर्मचारी रोजगार संकट का सामना करेंगे।
पहले रिक्त पद भरने पर जोर
बसवराज होरट्टी ने कहा कि शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में शिक्षकों और गैर-शिक्षकीय कर्मचारियों के पद रिक्त हैं। ऐसे में नई कक्षाएं और नए विद्यालय शुरू करने के बजाय पहले सभी रिक्त पदों को भरा जाए तथा सरकारी स्कूलों में आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। शिक्षकों की कमी के कारण सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है और अभिभावक निजी विद्यालयों की ओर रुख कर रहे हैं।
उन्होंने सरकार से मांग की कि मौजूदा निर्णय पर पुनर्विचार करते हुए सरकारी विद्यालयों के उन्नयन की प्रक्रिया रोकी जाए अथवा ऐसे विद्यालयों को उन क्षेत्रों में स्थापित किया जाए, जहां निजी अनुदानित या गैर-अनुदानित विद्यालय उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही भविष्य में किसी भी विद्यालय के उन्नयन या नए विद्यालय की अनुमति विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही दी जाए।
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