आरोपों की पारदर्शी जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन श्रद्धालु धर्म पर विश्वास न खोएं
दावणगेरे. महाराष्ट्र के जैन मुनि श्रीनयरक्षित विजय ने कहा कि अयोध्या के श्रीराम मंदिर से जुड़े कथित दान अनियमितता प्रकरण की निष्पक्ष एवं पारदर्शी जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। हालांकि, ऐसे आरोपों के आधार पर श्रद्धालुओं को अपनी धार्मिक आस्था डगमगाने नहीं देनी चाहिए।
सत्य सामने आए, तभी बने राय
दावणगेरे में शनिवार को आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मुनि श्रीनयरक्षित विजय ने कहा कि श्रीराम मंदिर जैसे आस्था के केंद्र से जुड़े आरोप अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। मामले की सत्यता सामने लाने के लिए संबंधित एजेंसियों को निष्पक्ष और आधिकारिक जांच करनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर अनियमितता सिद्ध होती है तो दोषियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
आस्था को आरोपों से न जोड़ें
उन्होंने कहा कि किसी एक प्रकरण के आधार पर धर्म और ईश्वर के प्रति लोगों की श्रद्धा पर प्रश्नचिह्न नहीं लगाया जाना चाहिए। धार्मिक आस्था व्यक्ति के आध्यात्मिक जीवन का आधार होती है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच पूरी होने और सत्य सामने आने का इंतजार करना चाहिए।
मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता जरूरी
जैन मुनि ने कहा कि सरकारी अधीनस्थ हिंदू मंदिरों के प्रबंधन, सुरक्षा और प्रशासन को लेकर समय-समय पर चिंताएं सामने आती रही हैं। ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए धार्मिक संस्थानों के संचालन में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनमानस में यह विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण संभव हुआ। इसी प्रकार वर्तमान प्रकरण में भी निष्पक्ष जांच के माध्यम से सत्य सामने आएगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी, ऐसी अपेक्षा समाज को है।
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