10 हजार ज्ञापन सौंपने की तैयारी, दो हजार लोगों की भागीदारी का दावा
सिरसी (उत्तर कन्नड़). बेड़ती-अघनाशिनी नदी मोड़ परियोजना को स्थायी रूप से निरस्त करने की मांग को लेकर 15 जून को सिरसी स्थित सहायक आयुक्त कार्यालय के समक्ष हस्ताक्षर एवं ज्ञापन अभियान चलाया जाएगा। बेड़ती-अघनाशिनी खाड़ी संरक्षण समिति ने क्षेत्र के लोगों से बड़ी संख्या में इसमें शामिल होने की अपील की है।
शहर के योग मंदिर में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में समिति के अध्यक्ष अनंत हेगड़े आशिसर ने कहा कि राज्य और केंद्र सरकारों की ओर से परियोजना को पूरी तरह वापस लेने के संबंध में स्पष्ट घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को रोकने और योजना को स्थायी रूप से रद्द कराने के लिए आंदोलन जारी रखना आवश्यक हो गया है।
पश्चिमी घाट और बेड़ती नदी बचाने का संकल्प
अनंत हेगड़े ने कहा कि इस महीने के अंत में नए मुख्यमंत्री से भी मुलाकात करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में मुख्यमंत्री ने नीति आयोग के समक्ष इस परियोजना का प्रस्ताव फिर प्रस्तुत किया है, जिससे विरोध आंदोलन को और तेज करने की आवश्यकता महसूस हुई है।
उन्होंने कहा कि पश्चिमी घाट और बेड़ती नदी के संरक्षण के लिए नदी तटों पर बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण अभियान भी चलाया जा रहा है। 7 जून को नेलमाविन क्षेत्र में माधवानंद भारती स्वामी ने वृक्षारोपण कर 15 जून के आंदोलन को सफल बनाने का आह्वान किया था।
10 हजार पत्र, दो हजार लोगों के जुटने का लक्ष्य
कार्यक्रम के संचालक विश्वनाथ हेगड़े शीगेहल्ली ने कहा कि 15 जून को सुबह 10.30 बजे सहायक आयुक्त कार्यालय में प्रत्येक व्यक्ति अलग-अलग हस्ताक्षर कर ज्ञापन सौंपेगा। इसके लिए 10 हजार पत्र एकत्र करने और लगभग दो हजार लोगों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है।
एक लाख परिवारों की आजीविका का सवाल
टीएसएस के अध्यक्ष गोपालकृष्ण वैद्य ने कहा कि टीएसएस से जुड़े 50 हजार परिवार तथा लगभग 60 हजार आश्रित परिवारों सहित एक लाख से अधिक परिवारों का भविष्य इस परियोजना से प्रभावित होगा। संस्था पहले से इस आंदोलन का समर्थन करती आई है और आगे भी समर्थन जारी रहेगा।
इस अवसर पर जी.आर. हेगड़े, मधुमति, सुरेश हक्किमने, गणपति के., रत्नाकर सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
जारी रहेगा आंदोलन
पश्चिमी घाट और बेड़ती नदी को बचाने के लिए इस परियोजना को स्थायी रूप से निरस्त करना आवश्यक है। डीपीआर को रोकने और सरकार से स्पष्ट निर्णय लेने तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा।
–अनंत हेगड़े आशिसर, अध्यक्ष, बेड़ती-अघनाशिनी खाड़ी संरक्षण समिति
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