उद्यानों की बदहाली पर नगर निगम की अनदेखी
बच्चों के खेल और नागरिकों की सैर के लिए तरस रहे इलाके
कलबुर्गी। कलबुर्गी महानगर निगम क्षेत्र की कई बस्तियों में नागरिकों के लिए उद्यानों की जमीन तो आरक्षित की गई है, लेकिन विकास के अभाव में ये उद्यान बदहाली का शिकार हैं। कहीं कूड़ा डाला जा रहा है तो कहीं मवेशी बांधे जा रहे हैं। झाडिय़ां और कांटेदार पौधे उग आने से इन उद्यानों में प्रवेश करना भी मुश्किल हो गया है।
हरियाली की जगह कूड़ा और कांटेदार झाडिय़ां
कोटनूर (डी) क्षेत्र के धरियापुर जीडीए आवासीय क्षेत्र का उद्यान वर्षों पहले लगाए गए पेड़-पौधों के सहारे खड़ा है। अब यह उद्यान न होकर मवेशियों का बाड़ा बन चुका है। यहां भैंस और गाय बांधी जाती हैं तथा उनके चारे का ढेर भी लगाया जाता है। बैठने के लिए बेंच तो दूर, उद्यान में प्रवेश के लिए गेट तक की व्यवस्था नहीं है।

पी एंड टी कॉलोनी के गाबरे आवासीय क्षेत्र में वेंकटेश रामय्या यरगोल स्मारक सरकारी विद्यालय के पास स्थित उद्यान भी बदहाल है। पेड़ काफी बड़े हो चुके हैं, लेकिन पूरा परिसर पत्थरों और गड्ढों से भरा है। उद्यान के एक हिस्से में नियमित रूप से कचरा डाला जाता है।
एक स्थानीय महिला ने बताया कि पहले यहां लोग मवेशी चराते थे। बस्ती के लोगों ने मिलकर उद्यान को खाली कराया और गेट पर ताला लगाया, लेकिन इसके बाद इसके विकास की ओर किसी ने ध्यान नहीं दिया। घर के पास उद्यान होने के बावजूद सैर के लिए दूर जाना पड़ता है।
खेल के उपकरण भी टूटे
धरियापुर जीडीए और लुकमान कॉलेज क्षेत्र के उद्यानों में कांटेदार झाडिय़ां उग आई हैं और बच्चों के खेल उपकरण अनुपयोगी पड़े हैं। नवजीवन नगर, ईश्वर नगर और महादेवप्पा रामपुरे आवासीय क्षेत्रों के उद्यानों की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। पुराने जेवरगी रोड स्थित गणेशनगर के उद्यान में खेल उपकरण टूट चुके हैं और पैदल चलने के लिए पथ तक नहीं है।
‘अनाथ बच्चे जैसी हालत’
जीडीए महादेवप्पा रामपुरे आवासीय क्षेत्र की स्पंदन नागरिक कल्याण संघ के अध्यक्ष बाबुराव कुलकर्णी ने कहा कि कोटनूर-धरियापुर क्षेत्र जीडीए और नगर निगम की उपेक्षा का शिकार है। आवासीय क्षेत्र विकसित करने वाली संस्थाओं ने उद्यानों के लिए जगह तो छोड़ी, लेकिन वहां हरियाली, पैदल पथ और बैठने की व्यवस्था तक नहीं है।
उन्होंने कहा कि कई उद्यानों में कांटेदार झाडिय़ां और गंदगी के कारण बांबी (बिल) बन गई हैं तथा सांप-बिच्छुओं का खतरा बना रहता है। क्षेत्र में नौ छात्रावास भी हैं। उद्यानों को विकसित कर बेंच और पैदल पथ बनाए जाएं तो हजारों विद्यार्थियों तथा स्थानीय नागरिकों को सैर और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों के लिए बेहतर सुविधा मिल सकती है।
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