भूजल संरक्षण में अटल भूजल योजना कारगर, दूसरे चरण की मांग बढ़ीएआइ फोटो।

14 जिलों की 1,199 ग्राम पंचायतों में लागू हुई योजना

बूंद-बूंद सिंचाई से 30-50 प्रतिशत तक पानी की बचत

किसानों की भागीदारी से भूजल पुनर्भरण, जल का विवेकपूर्ण उपयोग और टिकाऊ खेती को मिला बढ़ावा

हुब्बल्ली। भूजल संरक्षण, पानी के सीमित एवं सदुपयोग तथा भूजल स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की अटल भूजल योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आने के बाद राज्य में इसके दूसरे चरण की मांग बढऩे लगी है। विभिन्न जिलों के साथ किसान भी योजना को आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने विश्व बैंक के सहयोग से वर्ष 2020-21 में सात राज्यों में प्रायोगिक तौर पर अटल भूजल योजना शुरू की थी। इनमें कर्नाटक के अलावा गुजरात, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश शामिल थे। योजना के तहत सात राज्यों के 80 जिलों, 229 ब्लॉक और 8,203 ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया था। देशभर में 24.2 लाख से अधिक जल स्रोतों की पहचान कर उनका जियो-टैगिंग किया गया है।

कर्नाटक के 14 जिलों में हुआ क्रियान्वयन

कर्नाटक में योजना के पहले चरण के तहत 14 जिलों के 41 तालुकों की 1,199 ग्राम पंचायतों में इसे लागू किया गया। इनमें बागलकोट, बेलगावी, गदग, विजयनगर, दावणगेरे, चित्रदुर्ग, बेंगलूरु ग्रामीण, चामराजनगर, चिक्कबल्लापुर, चिक्कमगलूरु, हासन, कोलार, रामनगर और तुमकूरु जिले शामिल हैं।

योजना के तहत गांव स्तर पर जल सुरक्षा और भूजल स्तर बढ़ाने की कार्ययोजना किसानों की भागीदारी से तैयार की गई। आवश्यक स्थानों पर चेकडैम निर्माण, भूजल पुनर्भरण तथा पानी की बचत के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई को बढ़ावा दिया गया।

गदग जिले के गदग तालुक के 21 और रोण तालुक के 31, कुल 52 ग्राम पंचायतों में योजना लागू हुई। वहीं बेलगावी जिले के अथणी की 19 और रामदुर्ग की 26, कुल 55 ग्राम पंचायतें भी योजना के दायरे में रहीं।

30-50 प्रतिशत तक पानी की बचत

अटल भूजल योजना से किसानों को लाभ मिलने के साथ कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में भी सुधार हुआ। किसानों की फसल उत्पादकता बढ़ी और टिकाऊ कृषि को मजबूती मिली। ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई से 30 से 50 प्रतिशत तक पानी की खपत कम होने की जानकारी दी गई है। बोरवेल से अत्यधिक पानी निकालने की प्रवृत्ति में कमी आई तथा भूजल पुनर्भरण से जलस्तर बढ़ाने में मदद मिली।

योजना के संचालन में ग्राम पंचायतों, किसानों और स्थानीय समितियों की भागीदारी से भूजल संरक्षण के प्रति लोगों में जिम्मेदारी की भावना भी बढ़ी है।

योजना का क्रियान्वयन 2021 से शुरू हुआ

अटल भूजल योजना की घोषणा वर्ष 2020 में हुई थी, लेकिन कोविड-19 के कारण इसका क्रियान्वयन 2021 से शुरू हुआ और पिछले वर्ष अक्टूबर में इसका पहला चरण पूरा हुआ।
अक्षय पाटील, जल विशेषज्ञ, अटल भूजल योजना

भविष्य के लिए महत्वपूर्ण योजना

विशेषज्ञों के अनुसार, भूजल स्तर बढ़ाने, पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने और किसानों की उत्पादकता बढ़ाने की दृष्टि से यह भविष्य के लिए महत्वपूर्ण योजना है।
दिनेश पाटील, जल विशेषज्ञ, अटल भूजल योजना

 

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By Bharat Ki Awaz

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