17वीं सदी की अनमोल विरासत पर संकट
एकाश्म चट्टान काटकर बनाए रामलिंगेश्वर मंदिर को संरक्षण की दरकार
नायकनहट्टी (चित्रदुर्ग)। चित्रदुर्ग जिले के नायकनहट्टी के समीप स्थित रामदुर्ग किले के पत्थर अब धीरे-धीरे ढह रहे हैं। 17वीं सदी में पालेगारों (सामंतों) के शासनकाल में निर्मित यह ऐतिहासिक स्थल आज संरक्षण के अभाव में जर्जर होता जा रहा है। किले की दोहरी परकोटा संरचना और चट्टान को काटकर बनाया गया रामलिंगेश्वर का गुफा मंदिर तत्काल संरक्षण की मांग कर रहा है।
अजंता-एलोरा जैसी शिल्पकला
पहाड़ी की विशाल बलुआ पत्थर की चट्टान को काटकर निर्मित यह गुफा मंदिर अपने स्थापत्य और शिल्पकला के कारण विशेष महत्व रखता है। महाराष्ट्र के अजंता-एलोरा और कर्नाटक के बादामी-ऐहोल की तरह यहां भी चट्टान को तराशकर मंदिर बनाया गया है। बिना आधुनिक मशीनों के 17वीं सदी में एकाश्म चट्टान को काटकर इतना विशाल मंदिर तैयार किया जाना तत्कालीन शिल्पकारों की अद्भुत कला का प्रमाण है।
मंदिर करीब 29 फीट चौड़ा, 30 फीट लंबा और 9 फीट ऊंचा है। इसमें गर्भगृह और सभामंडप दो प्रमुख हिस्से हैं। गर्भगृह में तीन मेहराबें तथा करीब तीन फीट ऊंचा काले पत्थर का शिवलिंग स्थापित है। द्वार पर द्वारपालों और पंचशाखा द्वारपट्टिका की नक्काशी है।
सभामंडप में छह खंड और चार स्तंभ हैं। स्तंभों को 12 मुखों वाले ताराकार स्वरूप में तराशा गया है। इनमें बेडरकण्णप्पा, वराह, नरसिंह और नागबंध सहित अनेक उभरी हुई शिल्पाकृतियां हैं। राम-लक्ष्मण, विष्णु और भूदेवी की मूर्तियां भी आकर्षित करती हैं।
परकोटे में उग आए पेड़
किले की दोहरी परकोटा दीवारों पर पेड़-पौधे उग आए हैं। उनकी जड़ें पत्थरों को कमजोर कर रही हैं। श्रद्धालुओं में किले के पत्थरों से छोटे घर जैसी आकृति बनाकर मन्नत मांगने की परंपरा भी है, जिसके कारण पत्थर उखाड़े जा रहे हैं। इसके अलावा कथित रूप से निधि (खजाने) की तलाश में किले के आसपास गड्ढे भी खोदे गए हैं।
बोर्ड लगा, संरक्षण नहीं
पुरातत्व, संग्रहालय एवं विरासत विभाग ने इसे संरक्षित प्राचीन स्मारक घोषित करते हुए बोर्ड तो लगाया है, लेकिन संरक्षण कार्य अपेक्षित रूप से नहीं हुआ है। स्मारक को नुकसान पहुंचाने पर छह माह तक की जेल और दो हजार रुपए जुर्माने की चेतावनी भी दी गई है, फिर भी पत्थर उखाड़े जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
मंदिर में स्थित नंदी की प्रतिमा को भी दो बार क्षतिग्रस्त किया जा चुका है। फिलहाल पर्यटन विभाग की ओर से दिन में एक सुरक्षा गार्ड तैनात है। रात में भी सुरक्षा व्यवस्था करने की मांग की जा रही है।
रामलिंगेश्वर स्वामी ट्रस्ट के अध्यक्ष बंगारप्पा ने कहा कि पुरातत्व एवं विरासत विभाग को किले की सीमा चिह्नित कर उसका संरक्षण करना चाहिए। पर्यटन विभाग को पर्यटकों के लिए शौचालय, स्नानगृह, पार्क और पेयजल जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करानी चाहिए।
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