पालेगार शासनकाल के इतिहास पर नई रोशनी
खेत की जुताई के दौरान मिला 17 पंक्तियों का कन्नड़ शिलालेख
तालाब निर्माण के बदले भूमि दान का उल्लेख
चित्रदुर्ग। जिले के हिरियूर तालुक के जवनगोंडनहल्ली गांव में खेत की जुताई के दौरान पालेगार (सामंत राजाओं) शासकों के काल का एक महत्वपूर्ण शिलालेख मिला है। प्राचीन कन्नड़ लिपि में उत्कीर्ण इस शिलालेख को सुरक्षित संरक्षण के लिए चित्रदुर्ग के रंगय्या दरवाजा स्थित सरकारी संग्रहालय को सौंपा गया है।
काले पत्थर पर उत्कीर्ण 17 पंक्तियों वाले इस शिलालेख का संबंध पालेगार शासक कामगेति इम्मडी (द्वितीय) चिक्कण्णा नायक (ईस्वी 1575-1586) के शासनकाल से माना गया है। शिलालेख के अनुसार, शासक के अधीन अधिकारी लक्कजीय के पुत्र दोड्डगौड़ा ने जनकल्याण के लिए जवनगोंडनहल्ली में एक तालाब का निर्माण कराया था। इस लोकहित कार्य से प्रसन्न होकर राजा ने उन्हें पुरस्कारस्वरूप उंबली भूमि दान में प्रदान की थी।
शिलालेख के अंतिम भाग में दान भूमि की रक्षा संबंधी शाप-वचन भी अंकित है। इसमें कहा गया है कि इस भूमि का अधिकार दोड्डगौड़ा के वंशजों को सूर्य-चंद्र के अस्तित्व तक रहेगा और जो कोई इस दान भूमि का हरण करेगा, वह काशी में गाय की हत्या के समान पाप का भागी होगा।
पुरातत्व, संग्रहालय एवं विरासत विभाग के सहायक निदेशक जी. प्रल्हाद ने स्थल का निरीक्षण किया। शिलालेख के अध्ययन में के. रविकुमार नवलगुंद ने सहयोग किया। विशेषज्ञों का मानना है कि आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त इस शिलालेख पर विस्तृत शोध से क्षेत्र के इतिहास की कई नई जानकारियां सामने आ सकती हैं।
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