स्टाफ की कमी से जूझ रहा खाद्य सुरक्षा विभागस्टाफ की कमी से जूझ रहा खाद्य सुरक्षा विभाग

दक्षिण कन्नड़ में कार्रवाई सिर्फ मेंगलूरु तक सीमित

उडुपी में एक अधिकारी के भरोसे पूरा जिला

मेंगलूरु/उडुपी। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट पर निगरानी की जिम्मेदारी संभालने वाला खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता प्राधिकरण खुद कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। दक्षिण कन्नड़ में अधिकारियों ने पिछले कुछ दिनों से मेंगलूरु शहर के विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों पर जांच अभियान चलाया है, लेकिन पर्याप्त स्टाफ नहीं होने के कारण कार्रवाई अभी तालुक स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। उडुपी में स्थिति और भी गंभीर है, जहां पूरा जिला लगभग एक अधिकारी के भरोसे चल रहा है।

मेंगलूरु में पांच जगह कार्रवाई

मेंगलूरु शहर में अब तक पांच स्थानों पर छापेमारी कर खाद्य पदार्थों के नमूने लिए गए हैं। इन नमूनों को जांच के लिए मैसूरु स्थित क्षेत्रीय प्रयोगशाला भेजा गया है। दक्षिण कन्नड़ जिला मुख्यालय में एक स्थायी जिला नामित अधिकारी और बेल्तंगड़ी तालुक में एक स्थायी अधिकारी कार्यरत हैं। इसके अलावा चार कर्मचारी संविदा पर हैं। अन्य तालुकों में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी बनी हुई है।

उडुपी में “वन मैन आर्मी”

उडुपी जिले में खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता प्राधिकरण की जिम्मेदारी फिलहाल जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी विवेक त्रिमल्ले के कंधों पर है। उनके साथ केवल एक संविदा डेटा एंट्री ऑपरेटर और वाहन चालक हैं। जिले के छह तालुकों में उडुपी को छोडक़र किसी में भी तालुक स्तर का खाद्य सुरक्षा अधिकारी नहीं है।

हाल में उडुपी और मणिपाल थाना क्षेत्र के तीन स्थानों पर सहायक आयुक्त रश्मि, तहसीलदार गुरुराज और अधिकारी विवेक त्रिमल्ले ने संयुक्त कार्रवाई कर रसायनयुक्त 10,800 किलोग्राम केले जब्त किए थे। ऐसी कार्रवाई में अन्य विभागों के अधिकारियों का सहयोग लेना पड़ रहा है।

टीएचओ पर अतिरिक्त जिम्मेदारी

दक्षिण कन्नड़ के अधिकांश तालुकों में खाद्य सुरक्षा अधिकारी नहीं होने के कारण तालुक स्वास्थ्य अधिकारियों (टीएचओ) को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। स्वास्थ्य विभाग के नियमित कार्यों का दबाव पहले से अधिक होने के कारण उनके लिए खाद्य सुरक्षा संबंधी जिम्मेदारी निभाना चुनौती बन रही है।

14 साल पुरानी गाड़ी के भरोसे

उडुपी में खाद्य सुरक्षा विभाग पिछले 14 वर्षों से एक ही वाहन का उपयोग कर रहा है। अगले वर्ष इस वाहन की अवधि भी समाप्त हो जाएगी। नया वाहन उपलब्ध नहीं होने पर अधिकारियों को निजी या किराए के वाहनों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। ऐसे में खाद्य मिलावट के खिलाफ प्रभावी निगरानी के लिए पर्याप्त अधिकारी, कर्मचारी और परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी हो गया है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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