347 हेक्टेयर वन क्षेत्र में खनिज सर्वेक्षण को निजी कंपनी को अनुमति
जांच के नतीजों के आधार पर आगे तय होगी खनन की दिशा
हावेरी। जिले में सोने के संभावित भंडार की तलाश तेज हो गई है। वन विभाग ने जिले के वन क्षेत्र में कुल 347 हेक्टेयर भूमि पर 78 स्थानों पर बोरिंग कर मिट्टी और खनिज की जांच करने के लिए एक निजी कंपनी को अनुमति दी है। इससे हावेरी के भी कोलार की तरह सोने की खदानों के लिए पहचान बनाने की संभावना को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है।
पांच गांवों में होगी खुदाई
हावेरी वन मंडल ने अयस्क सर्वेक्षण के लिए कुंदूर गोल्ड माइन्स प्राइवेट लिमिटेड को अनुमति दी है। संस्था गुड्डद होन्नत्ती, सुरलेश्वर, जोयसरहल्ली, बसापुर और तिम्मापुर गांवों के वन क्षेत्र में 78 स्थानों पर ड्रिलिंग कर मिट्टी के नमूने एकत्र करेगी।
खनिज एवं भूविज्ञान विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यदि नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में सोना मिलने की पुष्टि होती है, तो भविष्य में इन क्षेत्रों में व्यावसायिक खनन की संभावना बन सकती है।
जीएसआइ ने जताई है संभावना
जिले के अन्य हिस्सों में भी सोने की खोज चल रही है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआइ) ने रट्टीहल्ली के नागवंद, राणेबेन्नूर के काकोल, ब्याडगी के छत्रक्की, बसापुर के निकट सालुगुड्डा और हानगल के संशीकोप्पा में सोने तथा अन्य खनिजों की संभावनाएं बताई हैं।
जीएसआइ ने हेलीकॉप्टर आधारित सर्वेक्षण के माध्यम से जिले के भूगर्भीय क्षेत्र की प्राथमिक जानकारी जुटाई है।
चार चरणों में होगी जांच
अधिकारियों के अनुसार अयस्क सर्वेक्षण चार चरणों में होता है। जी-4 और जी-3 चरणों में प्रारंभिक खोज के बाद सकारात्मक संकेत मिलने पर जी-2 और जी-1 चरण में विस्तृत जांच की जाती है। सोने की मौजूदगी और उसकी मात्रा की पुष्टि होने के बाद ही निविदा प्रक्रिया के जरिए खनन की अनुमति दी जाएगी।
जिला वन अधिकारी अक्षय प्रभाकर ने बताया कि जीएसआइ के दिशा-निर्देशों के अनुसार बसापुर, सुरलेश्वर और जोयसरहल्ली सहित 347 हेक्टेयर वन भूमि में निजी संस्था को सोने के अयस्क का सर्वेक्षण करने की अनुमति दी गई है।
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