अष्टमंगल चिंतन के बाद छह रविवार तक 150 स्वयंसेवकों ने किया श्रमदान
उल्लाल की धार्मिक परंपराओं को पुनर्जीवित करने की पहल
उल्लाल (दक्षिण कन्नड़)। रानी अब्बक्का के काल से जुड़े करीब 500 वर्ष पुराने पारंपरिक तालाब का अब कायाकल्प किया गया है। उल्लाल के किणी परिवार के घर में करीब चार महीने पहले हुए अष्टमंगल प्रश्न चिंतन के बाद शुरू हुआ यह कार्य छह रविवार तक चले श्रमदान के जरिए पूरा किया गया। इससे लंबे समय से उपेक्षित तालाब को नया स्वरूप मिला है।
23 कमियों के समाधान की पहल
किणी परिवार के घर में हुए अष्टमंगल प्रश्न चिंतन में सामने आए तथ्यों के आधार पर उल्लाल की धार्मिक परंपराओं के पुनर्जीवन के लिए विभिन्न कदम उठाए जा रहे हैं। पहले चरण में चिन्हित 23 कमियों के समाधान का कार्य जारी है। इसी के तहत दो प्राचीन तालाबों को फिर से उपयोग योग्य बनाने की योजना बनाई गई है।
सोमनाथ देव के साथ आने वाले दर्शन पात्रियों के स्नान से जुड़े बताए जा रहे प्राचीन तालाब की करीब 150 स्वयंसेवकों ने छह रविवार तक श्रमदान कर सफाई की। अब तालाब के पानी का उपयोग धार्मिक कार्यों में किया जा रहा है, जिससे इसे फिर से धार्मिक महत्व मिला है।
यह कार्य कोंडेनूरु नित्यानंद योगाश्रम के योगानंद सरस्वती स्वामी के मार्गदर्शन तथा मूडबिद्री जैन मठ के स्वस्तिश्री भट्टारक चारुकीर्ति पंडिताचार्य महास्वामी के आशीर्वाद से किया गया। इसमें रानी अब्बक्कादेवी के परिवारजनों, किणी परिवार और उल्लाल के हिंदू समुदाय ने सहयोग दिया।

रुकी परंपराओं को फिर शुरू करने की तैयारी
पिछले कुछ वर्षों में उल्लाल के कई हिंदू परिवारों में अप्रत्याशित परेशानियां सामने आने के बाद अष्टमंगल प्रश्न चिंतन कराया गया था। इस दौरान रानी अब्बक्का के समय पूजित देवी-देवताओं से जुड़ी कुछ पुरानी परंपराओं के बंद होने तथा कई देवस्थानों के जीर्ण होने की बात सामने आई। अब संबंधित कमियों को दूर करने के साथ बंद पड़ी परंपराओं को फिर शुरू करने की पहल की जा रही है।
दूसरे तालाब में गौपूजा
उल्लाल मेलगड़ी स्थित सोमनाथ देव के दूसरे स्नान तालाब को भी पुन: उपयोग योग्य बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत गौपूजा की गई है। अगले चरण में महारुद्र यज्ञ आयोजित किए जाने की संभावना है।
योगानंद सरस्वती स्वामी ने कहा कि अष्टमंगल चिंतन में उल्लाल की रानी अब्बक्का के महल सहित क्षेत्र के पुराने वैभव को पुनर्जीवित करने के प्रयास की आवश्यकता सामने आई थी। इसी दिशा में पहला तालाब पुनर्जीवित किया गया है और दूसरे तालाब का कार्य भी स्वयंसेवकों के सहयोग से पूरा किया जाएगा।

उल्लाल लोककल्याण कार्य शुरू किया
रानी अब्बक्का के त्याग और स्वाभिमान से इतिहास रचने वाली इस भूमि की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत को संरक्षित कर अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से उल्लाल लोककल्याण कार्य शुरू किया गया है। पीएचडी शोध के दौरान उल्लाल के इतिहास और धार्मिक परंपराओं के अध्ययन से उपजे विचार अब कार्यरूप ले रहे हैं।
–डॉ. लता राई, सचिव, निर्मल भारत चैरिटेबल ट्रस्ट, मेंगलूरु
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