पालक्काड मंडल से दक्षिण-पश्चिम रेलवे के मैसूरु मंडल में शामिल करने की तैयारी
लंबे समय की मांग को मिली अहम सफलता
मेंगलूरु। मेंगलूरु को दक्षिण रेलवे के पालक्काड मंडल से हटाकर दक्षिण-पश्चिम रेलवे (दपरे) के मैसूरु मंडल के अधीन लाने की प्रक्रिया को महत्वपूर्ण मंजूरी मिली है। लंबे समय से मेंगलूरु को दपरे में शामिल करने और अलग रेल मंडल बनाने की मांग उठती रही है। मैसूरु मंडल में शामिल करने का कदम अलग मंडल की मांग की दिशा में भी महत्वपूर्ण शुरुआत माना जा रहा है। हालांकि, अंतिम व्यवस्था और क्रियान्वयन का स्वरूप आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद स्पष्ट होगा।
पालक्काड मंडल के लिए बड़ा राजस्व केंद्र
दक्षिण रेलवे में चेन्नई, तिरुची, तिरुवनंतपुरम, सेलम और पालक्काड पांच मंडल हैं। मेंगलूरु अब तक पालक्काड मंडल के अधीन था। वर्ष 2024-25 में मंडल ने यात्री सेवाओं से करीब 935 करोड़ रुपए और माल ढुलाई से 583.37 करोड़ रुपए समेत कुल 1,607 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया। इसमें मेंगलूरु क्षेत्र का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
न्यू मेंगलूरु बंदरगाह क्षेत्र में माल की लोडिंग से सालाना औसतन करीब 60 करोड़ रुपए और अनलोडिंग से करीब 18 करोड़ रुपए का राजस्व मिलने का अनुमान है। मेंगलूरु सेंट्रल स्टेशन से प्रतिदिन औसतन करीब 12 लाख रुपए और मेंगलूरु जंक्शन से करीब 4.5 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त होता है।
यात्री समस्याओं के शीघ्र समाधान की उम्मीद
वर्तमान में मेंगलूरु की रेल व्यवस्था विभिन्न प्रशासनिक दायरों से जुड़ी होने के कारण यात्री शिकायतों, रेल सेवाओं के विस्तार, स्टेशन विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े मामलों में समन्वय की समस्या सामने आती रही है। मैसूरु मंडल के अधीन आने से इन प्रशासनिक अड़चनों के कम होने तथा यात्री समस्याओं के तेजी से समाधान की उम्मीद है।
मेंगलूरु-हासन-मैसूरु रेल मार्ग के कई हिस्से पहले से ही दक्षिण-पश्चिम रेलवे के मैसूरु मंडल के अधीन हैं। ऐसे में मेंगलूरु को भी इसी मंडल से जोडऩे से संचालन और प्रशासनिक समन्वय बेहतर होने की संभावना है।
कर्मचारियों को मिलेगा विकल्प
क्षेत्र परिवर्तन के साथ अधिकारियों और कर्मचारियों के स्थानांतरण की प्रक्रिया संबंधित नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी। राजपत्रित अधिकारियों के स्थानांतरण आदेश उचित समय पर जारी किए जाएंगे, जबकि समूह-बी अधिकारियों के लिए मौजूदा नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी। गैर-राजपत्रित कर्मचारियों को दक्षिण रेलवे में बने रहने या दक्षिण-पश्चिम रेलवे में जाने का विकल्प दिए जाने की बात कही गई है।
चौटा ने बताया महत्वपूर्ण कदम
मेंगलूरु के सांसद कैप्टन ब्रिजेश चौटा ने कहा कि निरंतर प्रयासों के कारण लंबे समय से चली आ रही मांग को आगे बढ़ाने में सफलता मिली है। जून 2024 में सांसद के रूप में शपथ लेने के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने इस मांग को केंद्र सरकार के समक्ष प्राथमिकता से रखा था। इसके बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ कई दौर की चर्चा तथा संसदीय मंचों पर लगातार प्रयास किए गए।
चौटा के अनुसार, इस बदलाव से अधिकार क्षेत्र संबंधी अड़चनें कम होंगी, समन्वय बेहतर होगा और तटीय कर्नाटक में रेल बुनियादी ढांचे तथा संपर्क के विकास पर अधिक ध्यान दिया जा सकेगा।
रेल उपयोगकर्ताओं ने किया स्वागत
पश्चिमी तट रेलवे यात्री विकास समिति के सचिव अनिल हेगड़े ने निर्णय का स्वागत करते हुए सांसद चौटा के प्रयासों के लिए आभार जताया। केंद्रीय रेल राज्य मंत्री वी. सोमण्णा ने भी कहा कि मेंगलूरु क्षेत्र को दक्षिण-पश्चिम रेलवे से जोडऩे से प्रशासनिक अड़चनें दूर होंगी और तटीय क्षेत्र में रेल बुनियादी ढांचे तथा संपर्क के विकास को नई गति मिलेगी।
कोंकण रेलवे के विलय पर भी जोर
चौटा ने कहा कि आगे कोंकण रेलवे के विलय, कोंकण रेल मार्ग के सुधार और दोहरीकरण के लिए प्रयास जारी रहेंगे। साथ ही पश्चिमी घाट क्षेत्र में बेहतर रेल संपर्क तथा मेंगलूरु-बेंगलूरु रेल मार्ग के दोहरीकरण पर भी जोर दिया जाएगा।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और केंद्रीय रेल राज्य मंत्री वी. सोमण्णा के प्रति आभार जताते हुए कहा कि आधिकारिक अधिसूचना के बाद मेंगलूरु के रेल विकास को और गति देने के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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