तृतीय भाषा के रूप में हिंदी की पढ़ाई जारी रखने की मांग, शिक्षकों का प्रदर्शनतृतीय भाषा के रूप में हिंदी की पढ़ाई जारी रखने की मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन करते शिक्षक।

धारवाड़। तृतीय भाषा के रूप में हिंदी विषय की पढ़ाई जारी रखने तथा 15 हजार शिक्षकों की भर्ती में हिंदी बीएड अभ्यर्थियों को शामिल करने की मांग को लेकर हिंदी भाषा प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय शिक्षक संघ की जिला इकाई ने जिलाधिकारी कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पिछले वर्ष एसएसएलसी बोर्ड परीक्षा में तृतीय भाषा के लिए अंकों के बजाय ग्रेड देने के नियम का विद्यार्थियों ने विरोध किया था और न्यायालय के माध्यम से अंक प्राप्त किए थे। इस शैक्षणिक वर्ष में करीब 1,800 विद्यालयों में तृतीय भाषा के स्थान पर एनएसक्यूएफ के तहत एआइ विषय लागू किए जाने से हिंदी पढऩे के इच्छुक हजारों विद्यार्थियों और शिक्षकों के सामने समस्या खड़ी हो गई है।

उन्होंने कहा कि यह नीति जारी रही तो दसवीं कक्षा तक हिंदी की पढ़ाई आठवीं कक्षा तक सीमित हो जाएगी, जिसका असर आगे की उच्च शिक्षा पर भी पड़ेगा।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों से हिंदी शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई है। 15 हजार शिक्षकों की प्रस्तावित भर्ती में केवल कन्नड़ और अंग्रेजी को अवसर दिया गया है, जबकि 4 हजार से अधिक हिंदी शिक्षक पद रिक्त हैं।

उन्होंने हिंदी शिक्षकों को भर्ती में शामिल करने तथा एनएसक्यूएफ (एआइ) व्यवस्था समाप्त कर तृतीय भाषा की पढ़ाई जारी रखने की मांग की। प्रदर्शन में एल.पी. लमाणी, राजकुमार नायक, विजयलक्ष्मी पाटील, शीला भंडारी और कविता चांदगुड़े सहित अन्य शिक्षक उपस्थित थे।

 

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By Bharat Ki Awaz

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