दांडेली क्षेत्र में तेंदुओं की आवाजाही पर वन विभाग ने दी सावधानी बरतने की सलाह; अफवाहों से बचने की अपील
दांडेली, (उत्तर कन्नड़)। दांडेली के आसपास के सीमावर्ती ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में रात के समय तेंदुओं की आवाजाही सामान्य रूप से देखी जा रही है। राहत की बात यह है कि अभी तक इंसानों पर हमले की कोई घटना सामने नहीं आई है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इंसानों को देखते ही तेंदुए अपने रास्ते चुपचाप निकल जाते हैं।
आवारा श्वानों के शिकार के लिए आबादी का रुख
हाल के दिनों में क्षेत्र में आवारा श्वानों (कुत्तों) की संख्या बढ़ी है। आसान शिकार की तलाश में तेंदुए जंगलों से सटे इलाकों में आकर श्वानों का शिकार करते हैं और वापस जंगलों की ओर लौट जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेंदुओं की प्राकृतिक आवाजाही को रोकने के बजाय मानव-वन्यजीव संघर्ष की संभावनाओं को समाप्त करने के लिए एहतियात बरतना बेहद जरूरी है।
वन विभाग द्वारा जरूरी दिशा-निर्देश
स्थिति को देखते हुए वन विभाग ने ग्रामीणों के साथ बैठक कर सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने सलाह दी है कि रात में अकेले बाहर निकलने से बचें, टॉर्च का प्रयोग करें, बच्चों और पालतू जानवरों को सुरक्षित स्थानों पर रखें तथा तेंदुआ दिखाई देने पर उसका पीछा करने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचित करें।
सनसनीखेज खबरों और अफवाहों पर रोक की मांग
वन विभाग ने तेंदुओं के दिखने की घटनाओं को अतिरंजित (मिर्च-मसाला लगाकर) कर पेश करने वाले कुछ यूट्यूब चैनलों पर नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें, भयभीत न हों और केवल वन विभाग की आधिकारिक हिदायतों का पालन करें।
कचरा प्रबंधन और प्रशासन की जिम्मेदारी
इसके साथ ही, स्थानीय प्रशासन से मांग की गई है कि वह सीमावर्ती इलाकों में कचरा प्रबंधन सुधारे और आवारा श्वानों की बढ़ती आबादी पर नियंत्रण पाए। ग्रामीणों का कहना है कि तेंदुए रिहायशी इलाकों की ओर आकर्षित न हों, इसके लिए स्वच्छता और पर्यावरण प्रबंधन पर ध्यान देना सबसे कारगर उपाय है।
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