सरकार से उम्मीद टूटी, ग्रामीणों ने खुद भरे सड़क के गड्ढेसडक़ के गड्ढे भरते ग्रामीण।

चिक्कमगलूरु में बदहाल राजमार्ग से परेशान ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर किया मरम्मत का काम

चिक्कमगलूरु। सडक़ में गड्ढे हैं या गड्ढों में सडक़—यह समझना मुश्किल हो गया है। राजमार्ग की बदहाली से परेशान एन.आर. पुर तालुक के मागुंडी गांव के ग्रामीणों ने मंगलवार को खुद चंदा जुटाकर सडक़ के गड्ढे भर दिए। ग्रामीणों की इस पहल ने प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्रतिदिन सैकड़ों वाहन चालक परेशान

प्रसिद्ध धार्मिक स्थल होरनाडु को जोडऩे वाले बालेहोन्नूर-होरनाडु मार्ग पर मागुंडी गांव के पास सडक़ पूरी तरह जर्जर हो चुकी थी। इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों पर्यटक और स्थानीय लोग वाहनों से आवागमन करते हैं। बड़े-बड़े गड्ढों के कारण वाहन चालकों को बेहद कठिन परिस्थितियों में यात्रा करनी पड़ रही थी।

सडक़ की स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि ग्रामीणों के अनुसार केवल मजबूत और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने वाले वाहनों के लिए ही यहां से गुजरना संभव रह गया था।

अधिकारियों की अनदेखी से आक्रोश

ग्रामीणों ने सडक़ की बदहाली की जानकारी कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को दी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन की कथित लापरवाही से नाराज ग्रामीणों ने आखिरकार खुद ही धन एकत्र किया और राजमार्ग के गड्ढों को भरने का काम शुरू कर दिया।

ग्रामीणों की इस पहल से सडक़ को फिलहाल कुछ राहत मिली है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठ खड़ा हुआ है कि राज्य राजमार्ग की मरम्मत की जिम्मेदारी निभाने के बजाय ग्रामीणों को ही चंदा जुटाकर सडक़ क्यों सुधारनी पड़ रही है?

 

Breaking News सबसे पहले पाना चाहते हैं?

अभी हमारे WhatsApp Channel को join करें

हर खबर सबसे पहले

Join करें : https://whatsapp.com/channel/0029Vb7S2RA65yD9fZX4Og1Z

 

Spread the love

By Bharat Ki Awaz

मैं भारत की आवाज़ हिंदी न्यूज़ पोर्टल से जुड़ा हुआ हूँ, जहाँ मेरा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और ताज़ा ख़बरें पहुँचाना है। राजनीति, समाज, संस्कृति और स्थानीय मुद्दों पर गहरी रुचि रखते हुए मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि समाचार केवल सूचना न हों, बल्कि पाठकों को सोचने और समझने का अवसर भी दें। मेरी लेखनी का मक़सद है—जनता की आवाज़ को मंच देना और देश-समाज से जुड़े हर पहलू को ईमानदारी से प्रस्तुत करना। भारत की आवाज़ के माध्यम से मैं चाहता हूँ कि पाठक न केवल ख़बरें पढ़ें, बल्कि उनसे जुड़ाव महसूस करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *