दशकों बाद 56 आदिवासी परिवारों के घर रोशन होंगेदशकों बाद 56 आदिवासी परिवारों के घर रोशन होंगे

पश्चिमी घाट में बिजली पहुंचाने को मिली मंजूरी

कुंतलूर और नावूर के घरों में भूमिगत केबल से होगी आपूर्ति

बेल्तंगडी (दक्षिण कन्नड़)। पश्चिमी घाट की तलहटी में वर्षों से आधुनिक सुविधाओं से वंचित और अंधेरे में जीवन गुजार रहे 56 परिवारों के घर जल्द रोशन होने वाले हैं। बेल्तंगडी तालुक के कुंतलूर और नावूर गांवों के इन परिवारों को बिजली कनेक्शन देने की योजना को वन एवं वन्यजीव विभाग से मंजूरी मिल गई है।

बेल्तंगडी तालुक के पश्चिमी घाट क्षेत्र में कुल 107 घर अब तक बिजली सुविधा से वंचित हैं। कुछ घरों में सौर ऊर्जा की व्यवस्था थी, लेकिन वह पर्याप्त नहीं थी। बिजली कनेक्शन की मांग को लेकर ग्रामीणों ने लंबे समय तक संघर्ष किया। वन एवं वन्यजीव संरक्षण से जुड़े नियमों के कारण अब तक अनुमति नहीं मिल पाई थी। अब संबंधित बोर्ड की मंजूरी मिलने से 56 घरों तक बिजली पहुंचाने का रास्ता साफ हो गया है।

56 घरों को मिलेगी बिजली

नावूर गांव के पुलित्तडी और एर्मले कास्रोली क्षेत्र के 24 अनुसूचित जनजाति परिवारों, कुंतलूर गांव की आलंब अनुसूचित जनजाति कॉलोनी के 28 परिवारों तथा अन्य चार परिवारों समेत दोनों गांवों के कुल 56 घरों को बिजली कनेक्शन देने की अनुमति मिली है।

लालटेन के सहारे कटता था जीवन

इन घरों में बिजली नहीं होने के कारण लोग लंबे समय से मिट्टी के तेल (केरोसीन) के दीयों पर निर्भर थे। बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर के रोजमर्रा के काम तक प्रभावित होते थे। आधुनिक सुविधाओं का इस्तेमाल करना मुश्किल था। विशेष रूप से ऑनलाइन शिक्षा इन परिवारों के बच्चों के लिए लगभग असंभव थी।

51 घरों के लिए अब भी चुनौती

कुल 107 घरों में से 56 को बिजली मिलने वाली है, लेकिन 51 घरों के लिए अभी अनुमति नहीं मिली है। बताया जा रहा है कि जिन इलाकों में एक ही स्थान पर 10 से कम घर हैं, वहां भूमिगत केबल बिछाने के बजाय पुनर्वास की संभावना पर विचार किया जा रहा है। इसी कारण कुछ क्षेत्रों में अनुमति फिलहाल रोक दी गई है।

नारावी गांव के नूजोडी और कुळंताजे में पांच, नावूर गांव की कडेलु एसटी कॉलोनी में आठ, सवणालु गांव के हित्तिलपेल में नौ तथा मलवंतिके गांव के बंगारुबली, सूरली, पातलिके और तिम्मय्यकंड क्षेत्रों में 18 घर बिजली से वंचित हैं। इसके अलावा चिक्कमगलूरु डिवीजन में आने वाले मलवंतिके गांव के बंगारुबली क्षेत्र के 11 एसटी घर भी शामिल हैं। इस तरह कुल 51 घरों तक बिजली पहुंचाना अभी चुनौती बना हुआ है।

भूमिगत केबल से बिजली आपूर्ति

पश्चिमी घाट की संवेदनशील पारिस्थितिकी के बीच बिजली पहुंचाना सामान्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण है। बिजली के खंभे लगाने और ऊपर से तार खींचने के लिए पेड़ों को हटाना पड़ सकता है। मानसून के दौरान पेड़ों के तारों पर गिरने से बिजली आपूर्ति बाधित होने के साथ वन्यजीवों के लिए भी खतरा पैदा हो सकता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए कुंतलूर और नावूर क्षेत्र के 56 घरों तक खंभों के बजाय भूमिगत केबल के माध्यम से बिजली पहुंचाने की अनुमति दी गई है। इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना बिजली सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

2025 में हुआ था सर्वे

बिजली विभाग ने फरवरी 2025 में इन क्षेत्रों का सर्वे किया था। इसके बाद स्थानीय निवासियों ने बिजली कनेक्शन के लिए ऐप के माध्यम से आवेदन भी किए थे। हालांकि वन्यजीव विभाग की अनुमति नहीं मिलने के कारण काम आगे नहीं बढ़ सका था। अब वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद बिजली कनेक्शन की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है।

लंबे संघर्ष को मिली सफलता

कर्नाटक आदिवासी अधिकार समन्वय समिति के संचालक शेखर लायला ने कहा कि पश्चिमी घाट के इन घरों तक बिजली पहुंचाने के लिए लंबे समय से संघर्ष किया जा रहा था। कुंतलूर और नावूर के बस्तियों को बिजली उपलब्ध कराने के लिए अनुदान आवंटित करने की मांग को लेकर समिति के नेतृत्व में ऊर्जा मंत्री से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा गया था। अब इस संघर्ष को सफलता मिली है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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