"साइबर ठगों का डिजिटल शिकंजा: कर्नाटक में एक साल में 1,468 करोड़ साफ""साइबर ठगों का डिजिटल शिकंजा: कर्नाटक में एक साल में 1,468 करोड़ साफ"

तीन साल में 6,000 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी

372 आरोपी गिरफ्तार, 241 मामलों में चार्जशीट

डिजिटल अरेस्ट से फर्जी निवेश तक नए-नए हथकंडे

हुब्बल्ली। कर्नाटक में साइबर ठगी का जाल लगातार फैलता जा रहा है। पुलिस की ओर से लगातार कार्रवाई और जागरूकता अभियान चलाए जाने के बावजूद साइबर अपराधियों के नए-नए तरीके सामने आ रहे हैं। बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी, साइबर पुलिस, नकली ओटीपी, गिफ्ट कूपन और निवेश के नाम पर लोगों को झांसे में लेकर लाखों रुपए ऐंठे जा रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भी लोगों को निशाना बनाया जा रहा है।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, 2026 में अब तक 1,468 करोड़ रुपए की साइबर ठगी सामने आई है। इससे पहले 2025 में 2,318 करोड़ रुपए और 2024 में 2,399 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी दर्ज हुई थी।

तीन साल में 2,312 आरोपी गिरफ्तार

साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी तेज की गई है। आंकड़ों के अनुसार, 2024 में 936, 2025 में 1,004 और 2026 में 372 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। इसी अवधि में क्रमश: 3,815, 1,991 और 241 मामलों में चार्जशीट दाखिल की गई है।

ऐसे फंसाते हैं जालसाज

बैंक खाते बंद होने का डर, फर्जी ओटीपी, डिजिटल अरेस्ट, नकली निवेश योजना, गिफ्ट कूपन और पुलिस अधिकारी बनकर फोन करना साइबर अपराधियों के प्रमुख हथकंडे हैं। फेसबुक, एक्स और इंस्टाग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी लोगों से संपर्क कर ठगी की जा रही है।

पुलिस के अनुसार, ठगी का शिकार होने के बाद तुरंत सूचना देना बेहद महत्वपूर्ण है। शुरुआती समय में शिकायत मिलने पर धनराशि को रोकने या वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।

हर जिले में विशेष साइबर थाना

साइबर अपराधों की जांच और रोकथाम के लिए राज्य के प्रत्येक जिले और शहर में सीईएन (साइबर इकोनॉमिक एंड नारकोटिक्स) पुलिस थाने स्थापित किए गए हैं। जांच के लिए आधुनिक तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है और पुलिसकर्मियों को साइबर अपराध, एआई, डीपफेक तथा डिजिटल फोरेंसिक की विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है।

सीसीयू में साइबर फोरेंसिक यूनिट कार्यरत है, जो राज्य के पुलिस थानों को तकनीकी जांच में सहायता उपलब्ध कराती है। वहीं, साइबर अपराध की जांच, डिजिटल फोरेंसिक और प्रशिक्षण के लिए विशेष केंद्र के माध्यम से पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

बैंकिंग क्षेत्र से भी समन्वय

बैंकिंग धोखाधड़ी रोकने के लिए आरबीआई, पुलिस और बैंक अधिकारियों के साथ समन्वय बैठकें आयोजित की जा रही हैं। साइबर ठगी के मामलों में बैंक अधिकारियों से जांच में सहयोग और पीडि़तों की रकम वापस दिलाने में सहायता करने को कहा गया है।

एनसीआरपी पर दर्ज करें शिकायत

साइबर अपराध का शिकार होने पर नागरिक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अनजान लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी अथवा बैंक संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें और संदिग्ध कॉल पर तत्काल भरोसा न करें।

एक नजर में

वर्ष — साइबर ठगी — गिरफ्तार आरोपी — चार्जशीट

2024 — 2,399 करोड़ रुपए — 936 — 3,815
2025 — 2,318 करोड़ रुपए — 1,004 — 1,991
2026 — 1,468 करोड़ रुपए — 372 — 241

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By Bharat Ki Awaz

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