‘शिक्षा काशी’ को अब चाहिए अगली छलांगएनआईटी सुरत्कल।

दक्षिण कन्नड़-उडुपी में शिक्षा का मजबूत आधार

आधुनिक पाठ्यक्रम, सरकारी संस्थान और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दरकार

मेंगलूरु। दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिले शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय से अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। एसएसएलसी और पीयूसी परिणामों में लगातार बेहतर प्रदर्शन के साथ उच्च शिक्षा के लिए भी ये जिले विद्यार्थियों की पसंद बने हुए हैं। चिकित्सा, इंजीनियरिंग, कानून और प्रबंधन से लेकर कई विशिष्ट पाठ्यक्रमों के निजी संस्थान यहां मौजूद हैं। सुरत्कल में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) भी है। बावजूद इसके ‘शिक्षा काशी’ को अगली ऊंचाई तक ले जाने के लिए सरकारी स्तर पर बड़े फैसलों की जरूरत है।

सरकारी संस्थानों की कमी

पुत्तूर में स्वीकृत मेडिकल कॉलेज को जल्द शुरू करने के साथ दक्षिण कन्नड़ और उडुपी में और मेडिकल कॉलेजों की आवश्यकता है। तटीय क्षेत्र में सुरत्कल के एनआईटी के अलावा राष्ट्रीय स्तर के तकनीकी संस्थानों की कमी है। आईआईटी, आईआईएम और चिकित्सा क्षेत्र में एम्स जैसे संस्थानों की स्थापना के लिए केंद्र से पहल की अपेक्षा है।

एआई से रोबोटिक्स तक पढ़ाई

बदलते रोजगार बाजार के अनुरूप कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा साइंस, डिजिटल मार्केटिंग और रोबोटिक्स जैसे पाठ्यक्रमों का विस्तार जरूरी है। स्थानीय बैंकिंग, आईटी, स्वास्थ्य और पर्यटन क्षेत्र की कंपनियों को शिक्षण संस्थानों से जोडक़र विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप और रोजगार के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।

गांवों तक पहुंचे तकनीक

सरकारी एवं अनुदानित स्कूल-कॉलेजों में स्मार्ट कक्षाएं, आधुनिक कंप्यूटर और विज्ञान प्रयोगशालाएं विकसित करने के साथ ग्रामीण तथा तटीय क्षेत्रों में मजबूत इंटरनेट नेटवर्क जरूरी है। कॉलेजों में इनक्यूबेशन सेंटर और स्टार्टअप हब बढ़ाने से स्थानीय प्रतिभाओं को अपने विचारों को कारोबार में बदलने का अवसर मिलेगा।

प्रतिभा पलायन रोकना चुनौती

उच्च शिक्षा और रोजगार के लिए बड़ी संख्या में युवा दूसरे राज्यों और देशों का रुख करते हैं। दोनों जिलों में आईटी और बीपीओ हब विकसित कर स्थानीय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण रोजगार उपलब्ध कराया जाए तो प्रतिभा पलायन पर अंकुश लगाया जा सकता है। मेंगलूरु का माइग्रेशन सेंटर भी व्यवस्थित प्रशिक्षण और रोजगार संबंधी जानकारी के साथ फिर सक्रिय किए जाने की जरूरत है।

मेंगलूरु विश्वविद्यालय को पुनर्जीवन

आर्थिक संकट से जूझ रहे मेंगलूरु विश्वविद्यालय को पर्याप्त सरकारी सहायता देकर नई ऊर्जा देने की आवश्यकता है। आधुनिक जरूरतों के अनुरूप नए पाठ्यक्रम शुरू करने के साथ खेल, यक्षगान, नाटक और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए आधुनिक सुविधाएं विकसित करनी होंगी।

सवाल अब यह नहीं कि तटीय कर्नाटक शिक्षा में आगे है या नहीं। सवाल यह है कि इस मजबूत आधार को राष्ट्रीय स्तर के शिक्षा, शोध और रोजगार केंद्र में बदलने के लिए सरकार अगला बड़ा कदम कब उठाएगी?

“शिक्षा में अग्रणी होने के बाद अब तटीय कर्नाटक को शोध, नवाचार और रोजगार का भी अग्रणी केंद्र बनाना होगा।”

शिक्षा काशी की 8 बड़ी जरूरतें

पुत्तूर मेडिकल कॉलेज का जल्द संचालन
दक्षिण कन्नड़-उडुपी में नए मेडिकल कॉलेज
आईआईटी, आईआईएम व एम्स जैसे राष्ट्रीय संस्थान
एआई, डेटा साइंस और रोबोटिक्स के नए पाठ्यक्रम
सरकारी स्कूलों में स्मार्ट कक्षाएं व आधुनिक प्रयोगशालाएं
कॉलेजों में अधिक इनक्यूबेशन सेंटर और स्टार्टअप हब
आईटी/बीपीओ हब के जरिए स्थानीय रोजगार
मेंगलूरु विश्वविद्यालय के लिए विशेष आर्थिक पैकेज

 

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By Bharat Ki Awaz

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