मेंगलूरु नाम को कैबिनेट की सैद्धांतिक मंजूरी, 30 दिन में मांगी जाएंगी राय-आपत्तियां
‘ब्रांड मंगलूरु’ बनाम ऐतिहासिक पहचान पर छिड़ी बहस
मेंगलूरु। आखिरकार दक्षिण कन्नड़ जिले के नाम को लेकर वर्षों से चल रही बहस अब जनता के दरवाजे तक पहुंच गई है। राज्य मंत्रिमंडल ने दक्षिण कन्नड़ जिले का नाम बदलकर ‘मेंगलूरु जिला’ करने के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक सहमति दी है। अब मसौदा अधिसूचना जारी कर लोगों से एक महीने तक सुझाव और आपत्तियां मांगी जाएंगी। अंतिम फैसला सार्वजनिक राय और सरकार की आगे की प्रक्रिया के बाद होगा।
नाम बदलने के पक्ष में तर्क है कि ‘मेंगलूरु’ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहले से स्थापित नाम है। शिक्षा, रोजगार, पर्यटन और निवेश के लिए विदेशों में भी मेंगलूरु की पहचान मजबूत है। समर्थकों का कहना है कि जिला मुख्यालय के नाम से जिले की वैश्विक ब्रांडिंग आसान हो सकती है।
इसके उलट विरोधी पक्ष का तर्क है कि ‘दक्षिण कन्नड़’ केवल एक प्रशासनिक नाम नहीं, बल्कि क्षेत्र के इतिहास और कन्नड़ पहचान से जुड़ा हुआ नाम है। ग्रामीण और दूरदराज के तालुकों की अपनी अलग सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान है, जिसे केवल शहर के नाम से प्रतिस्थापित करने पर सवाल उठ रहे हैं।
1997 में भी बचा था दक्षिण कन्नड़
1997 में जे.एच. पटेल सरकार के दौरान दक्षिण कन्नड़ जिले का विभाजन कर उडुपी को अलग जिला बनाया गया था। उस समय दक्षिणी हिस्से ने ‘दक्षिण कन्नड़’ नाम बरकरार रखा। अब करीब तीन दशक बाद जिले के नाम को फिर बदलने का प्रस्ताव सामने आया है।
30 दिन में जनता की राय
सरकार मसौदा अधिसूचना जारी होने के बाद 30 दिन तक लिखित सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित करेगी। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने भी कहा है कि अंतिम निर्णय में लोगों की भावनाओं और नाम से जुड़े पारंपरिक पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा।
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं कि जिले का नाम क्या हो—‘दक्षिण कन्नड़’ या ‘मेंगलूरु’—बल्कि यह भी है कि आने वाली पीढिय़ों के लिए जिले की पहचान इतिहास से तय होगी या वैश्विक ब्रांड से।
30 दिन – जनता की राय का मौका
प्रस्तावित नाम – मेंगलूरु जिला
मौजूदा नाम – दक्षिण कन्नड़
फैसला – सार्वजनिक सुझाव-आपत्तियों के बाद
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