कृष्णा की धार थामकर तीन जिलों की 6 लाख हेक्टेयर जमीन को सिंचाई
33.313 टीएमसी क्षमता वाला जलाशय बना कृषि की जीवनरेखा
यादगीर। कृष्णा नदी की धार को थामे बसवसागर जलाशय ने मंगलवार, 22 सितंबर को अपने 44 वर्ष पूरे किया है। राज्य के बड़े जलाशयों में शामिल यह बांध आज केवल पानी का भंडार नहीं, बल्कि विजयपुर, यादगीर और रायचूर जिलों के करीब 6 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र की जीवनरेखा बन चुका है। इसी परियोजना ने आगे चलकर कृष्णा भाग्य जल निगम के गठन की नींव भी मजबूत की।
मुद्देबिहाल तालुक के सिद्धापुर गांव की सीमा में कृष्णा नदी पर बने इस बांध की आधारशिला 22 मई 1964 को तत्कालीन मैसूर राज्य के मुख्यमंत्री एस. निजलिंगप्पा और केंद्रीय मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने रखी थी। निर्माण कार्य 1969 में शुरू हुआ और करीब 15 वर्ष बाद 22 सितंबर 1982 को तत्कालीन मुख्यमंत्री आर. गुंडूराव ने नारायणपुर जलाशय को राष्ट्र को समर्पित किया।
10.97 किमी लंबा, 39 गेट
बांध की लंबाई 10.97 किलोमीटर और नींव से ऊंचाई 29.72 मीटर है। इसमें कुल 39 मुख्य क्रेस्ट गेट हैं। इनमें 25 विजयपुर, 9 यादगीर और 3 गेट रायचूर जिले की सीमा में आते हैं।
जलाशय की अधिकतम जल भंडारण क्षमता 33.313 टीएमसी है। इसके 39 गेटों से अधिकतम 13.40 लाख क्यूसेक पानी नदी में छोड़ा जा सकता है। अब तक बाढ़ के दौरान अधिकतम 6.25 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने का रिकॉर्ड है।
तीन जिलों के खेतों की उम्मीद
कृष्णा बेसिन की सिंचाई व्यवस्था में बसवसागर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इसके पानी से लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलती है। जलाशय के आधुनिकीकरण का काम ड्रिप परियोजना के तहत किया गया है और इसके लिए इसे एक्सीलेंस पुरस्कार भी मिल चुका है।
44 साल पूरे होने पर भी बसवसागर की अहमियत कायम है कि कृष्णा का पानी, लाखों हेक्टेयर खेत और करोड़ों किसानों की उम्मीदें आज भी इसी जलाशय से जुड़ी हैं।
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