गणेश विसर्जन में नियम टूटे, पुलिस की निगरानी के बावजूद नहीं दर्ज हुआ एक भी मामला
हुब्बल्ली। गणेश उत्सव के दौरान डीजे की आवाज 80 डेसीबल से अधिक होने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी देने वाली हुब्बल्ली-धारवाड़ पुलिस अब विसर्जन जुलूसों में नियमों के उल्लंघन पर सवालों के घेरे में है। उत्सव के शुरुआती दिन नियम तोडऩे वाले डीजे संचालकों पर छह मामले दर्ज किए गए थे, लेकिन पांचवें, सातवें और नौवें दिन की विसर्जन शोभायात्राओं में आवाज 80 से लेकर 120 डेसीबल तक पहुंचने के बावजूद एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ।
निगरानी हुई, कार्रवाई नहीं
पुलिस आयुक्त भूषण बोरसे ने उत्सव से पहले शांति समिति की बैठक और संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि डीजे की ध्वनि सीमा पर नजर रखने के लिए पुलिस ‘साउंड मीटर’ तथा ‘एसपीएल एंड डीबी मीटर’ मोबाइल एप का इस्तेमाल करेगी। इसके तहत विसर्जन जुलूसों में ध्वनि स्तर की जांच भी की गई। इसके बावजूद नियम उल्लंघन पर कार्रवाई नहीं होने से सवाल उठ रहे हैं।
हुब्बल्ली निवासी सीताराम हिरेमठ ने कहा कि इस वर्ष डीजे का शोर कम होने की उम्मीद थी, लेकिन कई जुलूसों में पिछले वर्षों की तुलना में अधिक शोर सुनाई दिया। उन्होंने रात 10 बजे से पहले रिहायशी इलाकों में तेज आवाज पर भी सवाल उठाया।
अस्पतालों के आसपास भी तेज आवाज
विद्यानगर क्षेत्र में अस्पतालों की मौजूदगी को देखते हुए एक चिकित्सक ने चिंता जताई। उनके अनुसार, अस्पतालों में हृदय रोगियों, प्रसूताओं, गर्भवती महिलाओं और अन्य मरीजों का उपचार चलता है। ऐसे क्षेत्रों में अत्यधिक शोर से मरीजों को परेशानी हो सकती है।
समता सेना के प्रमुख गुरुनाथ उल्लिकाशी ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि नियम तोडऩे वालों की जानकारी जुटाए जाने की बात कही जा रही है और बाद में कार्रवाई करने की संभावना जताई गई है। उन्होंने पूछा कि यदि अत्यधिक शोर से किसी की जान को खतरा हो तो कानून का क्या लाभ।
मामले की जांच की जाएगी
पुलिस आयुक्त भूषण बोरसे ने कहा कि डीजे नियमों के उल्लंघन को लेकर कोई शिकायत नहीं मिली है। मामले की जांच की जाएगी।
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