तुलु की मान्यता के बाद कर्नाटक में भाषाई मांगें तेजकर्नाटक तुलु साहित्य अकादमी।

उर्दू, कोडव और लंबाणी को भी आधिकारिक दर्जा देने की मांग

आठवीं अनुसूची में शामिल होने की बहस फिर गरमाई

उडुपी। अविभाजित दक्षिण कन्नड़ के लिए तुलु को अतिरिक्त आधिकारिक भाषा का दर्जा देने के राज्य सरकार के फैसले के बाद कर्नाटक में भाषाई अधिकारों को लेकर बहस तेज हो गई है। तुलु को मिली मान्यता के बाद उर्दू, कोडव और लंबाणी सहित अन्य भाषाई समुदायों की ओर से भी अपनी मातृभाषाओं को आधिकारिक दर्जा देने की मांग उठने लगी है।

उर्दू को लेकर भी मांग

2011 की जनगणना के अनुसार कर्नाटक में उर्दू बोलने वालों की संख्या 66.17 लाख यानी 10.83 प्रतिशत है। इसी आधार पर विभिन्न संगठनों की ओर से उर्दू को भी अतिरिक्त आधिकारिक भाषा का दर्जा देने की मांग की जा रही है।

एसडीपीआइ के प्रदेश अध्यक्ष अब्दुल मजीद ने कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में उर्दू माध्यम स्कूल संचालित हैं। उनके अनुसार, यदि तुलु को क्षेत्रीय स्तर पर अतिरिक्त आधिकारिक भाषा का दर्जा दिया जा सकता है तो उर्दू को भी यह अधिकार मिलना चाहिए।

कोडव और लंबाणी की भी आवाज

कोडव और लंबाणी जैसी भाषाओं के प्रतिनिधि भी अपनी भाषाई पहचान और संरक्षण को लेकर मांग उठा रहे हैं। 2011 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में लंबाणी बोलने वालों की संख्या करीब 9.74 लाख और कोडव बोलने वालों की संख्या करीब 1.13 लाख है।

अनुच्छेद 345 में राज्यों को अधिकार

संविधान का अनुच्छेद 345 राज्यों को कानून बनाकर एक या अधिक भाषाओं को राज्य के आधिकारिक कार्यों के लिए अपनाने का अधिकार देता है। इसी प्रावधान के तहत विभिन्न राज्यों में एक से अधिक भाषाओं को आधिकारिक मान्यता दी गई है।

आठवीं अनुसूची की मांग बरकरार

तुलु और कोडव को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग भी लंबे समय से जारी है। वर्तमान में आठवीं अनुसूची में 22 भाषाएं शामिल हैं। तुलु समेत कई अन्य भाषाएं इसमें शामिल किए जाने की मांग कर रही हैं। राज्य स्तर पर तुलु को मिली मान्यता के बाद इसके समर्थकों की नजर अब केंद्र स्तर पर संवैधानिक मान्यता की मांग पर है।

कर्नाटक की प्रमुख मातृभाषाएं
भाषा — आबादी — प्रतिशत
कन्नड़ — 4.06 करोड — 66.49 प्रतिशत
उर्दू — 66.17 लाख — 10.83 प्रतिशत
तेलुगु — 35.65 लाख — 5.84 प्रतिशत
तमिल — 21.01 लाख — 3.44 प्रतिशत
मराठी — 20.13 लाख — 3.29 प्रतिशत
तुलु — 15.92 लाख — 2.61 प्रतिशत
लंबाणी — 9.74 लाख — 1.59 प्रतिशत
हिंदी — 8.71 लाख — 1.43 प्रतिशत
कोंकणी — 7.64 लाख — 1.25 प्रतिशत
मलयालम — 7.45 लाख — 1.22 प्रतिशत
कोडव — 1.13 लाख — 0.18 प्रतिशत

Spread the love

By Bharat Ki Awaz

मैं भारत की आवाज़ हिंदी न्यूज़ पोर्टल से जुड़ा हुआ हूँ, जहाँ मेरा उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और ताज़ा ख़बरें पहुँचाना है। राजनीति, समाज, संस्कृति और स्थानीय मुद्दों पर गहरी रुचि रखते हुए मैं हमेशा कोशिश करता हूँ कि समाचार केवल सूचना न हों, बल्कि पाठकों को सोचने और समझने का अवसर भी दें। मेरी लेखनी का मक़सद है—जनता की आवाज़ को मंच देना और देश-समाज से जुड़े हर पहलू को ईमानदारी से प्रस्तुत करना। भारत की आवाज़ के माध्यम से मैं चाहता हूँ कि पाठक न केवल ख़बरें पढ़ें, बल्कि उनसे जुड़ाव महसूस करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *