26 एकड़ का तुंबू केरे फिर हुआ जीवंतएम.के. हुबली स्थित ऐतिहासिक तुंबू केरे तालाब।

16 लाख रुपए से कायाकल्प; गाद निकली, तटबंध मजबूत हुए, बढ़ा भूजल स्तर

एम.के. हुबली (बेलगावी)। कभी पूरे कस्बे की प्यास बुझाने वाला ऐतिहासिक तुंबू केरे तालाब दशकों के सूखे और उपेक्षा के बाद फिर पानी से लबालब हो गया है। करीब 26 एकड़ में फैले इस विशाल तालाब का श्रीक्षेत्र धर्मस्थल ग्रामीण विकास परियोजना (एसकेडीआरडीपी) बीसी ट्रस्ट के ‘नम्मा ऊरु-नम्मा केरे’ (हमारा गांव हमारा तालाब) अभियान के तहत करीब 16 लाख रुपए की लागत से कायाकल्प किया गया।

गाद हटाई, तटबंध मजबूत किए

लंबे समय से गाद और झाडिय़ों से पटे तालाब की सफाई कर बड़े पैमाने पर गाद निकाली गई। कमजोर तटबंधों को मजबूत करने के साथ सुरक्षा दीवार का निर्माण किया गया। तालाब में पानी जमा होने से आसपास के सैकड़ों बोरवेल के जलस्तर में सुधार हुआ है। इससे किसानों और स्थानीय नागरिकों को गर्मियों में पेयजल संकट से राहत मिलने की उम्मीद है। पशु-पक्षियों के लिए भी यह स्थायी जलस्रोत बन गया है।

मलप्रभा से पहुंचाया गया पानी

तालाब के प्राकृतिक जलागम मार्ग समय के साथ अतिक्रमण और अवरोधों की वजह से बंद हो गए हैं। फिलहाल मलप्रभा नदी के जैकवेल से पानी लिफ्ट कर तालाब में पहुंचाया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि तालाब को स्थायी जलस्रोत बनाने के लिए पुराने जलमार्गों और फीडर नालों को अतिक्रमणमुक्त कर पुनर्जीवित करना जरूरी है, ताकि बारिश का पानी प्राकृतिक रूप से तालाब तक पहुंच सके।

जलस्रोत बचाना सबकी जिम्मेदारी

एसकेडीआरडीपी चन्नम्मा कित्तूर के तालुक योजना अधिकारी बी.आर. योगेश ने कहा कि धर्माधिकारी डॉ. डी. वीरेंद्र हेग्गड़े के मार्गदर्शन में तालाब का समग्र विकास किया गया है। पुनर्जीवित जलस्रोत को स्वच्छ रखना और भविष्य के लिए सुरक्षित रखना अब स्थानीय जनता की जिम्मेदारी है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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