आसमान रूठा, जलस्रोत सूखेगज्जरी गांव के पास ठोला गाड़ी मटकियों को लाकर पानी भरती हुई महिलाएं।

हावेरी के 39 गांवों में किराए के बोरवेल से बुझ रही प्यास

49.84 प्रतिशत बारिश कम

2,058 तालाबों में सिर्फ 146 लबालब

1,129 में 30 प्रतिशत से भी कम पानी

गिरता भूजल बढ़ा रहा संकट

हावेरी। मानसून की बेरुखी अब खेतों से निकलकर गांवों की चौखट तक पहुंच गई है। जिले में बारिश करीब आधी रह जाने से तालाब सूखने लगे हैं और भूजल स्तर गिरने के कारण बोरवेल भी जवाब देने लगे हैं। पेयजल संकट से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने छह तालुकों के 33 ग्राम पंचायतों के 39 गांवों में 44 निजी बोरवेल किराए पर लेकर पानी की आपूर्ति शुरू की है।

1 जून से 27 सितंबर तक जिले में सामान्य 46.81 सेंटीमीटर बारिश के मुकाबले सिर्फ 23.48 सेंटीमीटर बारिश हुई। यानी बारिश में 49.84 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसका असर जिले के 2,058 तालाबों पर साफ दिखाई दे रहा है। इनमें केवल 146 तालाब पूरी तरह भरे हैं, जबकि 1,129 तालाबों में पानी 30 प्रतिशत से भी कम रह गया है। तीन तालाब पूरी तरह सूख चुके हैं।

तालाब घटे तो बोरवेल भी बेदम

ब्याडगी, हानगल, हिरेकेरूर, रट्टीहल्ली, सवणूर और शिग्गांव तालुक के 39 गांवों में पेयजल संकट सामने आया है। प्रशासन ने निजी बोरवेल किराए पर लेकर वैकल्पिक व्यवस्था की है। हानगल में सबसे अधिक 10 गांव प्रभावित हैं।

स्थिति से निपटने के लिए 66 गांवों में 70 नए बोरवेल खोदे गए हैं, जबकि 13 गांवों में पुराने बोरवेल का पुनर्भरण कराया गया है।

गर्मी से पहले ही खतरे की घंटी

अभी मानसून पूरी तरह विदा भी नहीं हुआ और पेयजल के लिए किराए के बोरवेल पर निर्भरता शुरू हो गई है। यदि बारिश नहीं हुई और तापमान बढ़ा तो तालाबों के साथ भूजल स्रोतों पर भी दबाव बढ़ेगा। इसका असर इंसानों के साथ पशुओं की पेयजल जरूरतों पर भी पड़ सकता है।

शिग्गांव तालुक के किसान भरमप्पा के अनुसार, गांव के तालाब में अभी थोड़ा पानी बचा है, लेकिन गर्मी बढऩे पर इसके पूरी तरह सूखने की आशंका है। ऐसे में पशुओं के लिए भी पानी का संकट खड़ा हो सकता है।

एक नजर में

बारिश में कमी : 49.84 प्रतिशत
कुल तालाब : 2,058
पूरी तरह भरे : 146
30 प्रतिशत से कम पानी : 1,129
पूरी तरह सूखे : 3
पेयजल संकट वाले गांव : 39
किराए के निजी बोरवेल : 44
नए बोरवेल : 70
पुनर्भरण किए गए बोरवेल : 13

 

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By Bharat Ki Awaz

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