145 एकड़ सरकारी गोमाल पर कब्जे का आरोपहोललकेरे तालुक के शिवगंगा गांव में अतिक्रमित गोमाल जमीन।

400 से ज्यादा मवेशियों के चारे पर संकट

खेत-बाग और प्लॉट में बदली चरागाह की जमीन

गांव के नाले पर कब्जे से तालाब तक नहीं पहुंच रहा बारिश का पानी

चित्रदुर्ग। होललकेरे तालुक के ताल्य होबली के शिवगंगा गांव में 145 एकड़ सरकारी गोमाल (चरागाह) जमीन पर कथित अतिक्रमण का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सर्वे नंबर 87 की इस सरकारी जमीन पर लम्बाणीहट्टी तांडा और शिवगंगा गांव के कुछ लोगों ने कब्जा कर खेत, बाग और आवासीय प्लॉट बना लिए हैं। इससे गांव के 400 से अधिक गाय, बछड़े और भैंसों के सामने चराई और चारे का संकट खड़ा हो गया है।

ग्रामीणों के अनुसार, करीब आठ-दस वर्ष पहले शिवगंगा में आकर बसे कुछ लोगों ने भी गोमाल की जमीन पर कब्जा कर लिया। सरकारी भूमि पर बोरवेल खोदने के साथ तार की बाड़ लगा दी गई है। कुछ हिस्सों को समतल कर खेती की जा रही है, जबकि कुछ जगह प्लॉट बनाए जाने का भी आरोप है।

पेड़ काटकर जमीन पर कब्जा

ग्रामीणों का कहना है कि गांव से लगी गोमाल जमीन पर पहले पेड़-पौधे थे। कथित अतिक्रमणकारियों ने इन्हें काटकर जमीन समतल कर दी। गांव के 400 से अधिक मवेशियों के लिए यही प्रमुख चरागाह था। आसपास दूसरी चराई की सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं होने से गोमाल के घटने का सीधा असर पशुपालकों पर पड़ रहा है।

ग्रामीणों के मुताबिक ग्राम पंचायत अधिकारियों और गांव के बुजुर्गों ने कई बार अतिक्रमण हटाने की समझाइश दी, लेकिन स्थिति में बदलाव नहीं हुआ। आरोप है कि गोमाल में अवैध खेती करने वालों ने आसपास की पुश्तैनी जमीन के मालिकों को भी परेशान किया और दूसरे गांव जाने वाले रास्ते पर कब्जा करने का प्रयास किया।

गांव का नाला भी कब्जे की जद में

गोमाल के साथ जलनिकासी व्यवस्था पर भी अतिक्रमण का आरोप है। ग्रामीणों के अनुसार, शिवगंगा तालाब की ओर जाने वाले नाले और जलनिकासी क्षेत्र पर कब्जे के कारण बारिश का पानी तालाब तक नहीं पहुंच पा रहा है। सर्वे नंबर 87 के पास करीब 45 से 50 फीट चौड़े गांव के नाले पर भी पिछले वर्ष अतिक्रमण किए जाने का आरोप लगाया गया है।

इसका नतीजा यह है कि बारिश का पानी तालाब में पहुंचने के बजाय खेतों में जमा हो रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से सरकारी गोमाल और गांव के नाले से तत्काल अतिक्रमण हटाने, जलनिकासी मार्ग बहाल करने तथा 400 से अधिक मवेशियों के लिए चराई की जमीन सुरक्षित करने की मांग की है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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