आलमट्टी में पानी का संकट, रबी की सिंचाई पर लटकी तलवारआलमट्टी जलाशय।

99 टीएमसी पर सिमटा जल भंडार, 16 सितंबर से आवक बंद

15 अक्टूबर की बैठक में तय होगा नहरों का भविष्य

जून 2027 तक पेयजल सुरक्षित रखने की चुनौती, किसानों को सिंचाई कटौती का डर

तीन बार पहले भी रबी में नहीं मिला था पानी

बागलकोट। आलमट्टी जलाशय में पानी घटने के साथ ही रबी फसलों की सिंचाई पर संकट गहराने लगा है। जलाशय का भंडार घटकर 99 टीएमसी रह गया है और 16 सितंबर से पानी की आवक पूरी तरह बंद है। ऐसे में नहरों में पानी कितने दिन छोड़ा जाए और रबी की फसलों को सिंचाई मिल पाएगी या नहीं, इसका फैसला 15 अक्टूबर को होगा। कृष्णा ऊपरी तट परियोजना की सिंचाई सलाहकार समिति की बैठक बेंगलूरु के विकास सौधा में जिला प्रभारी मंत्री विजयानंद काशप्पनवर की अध्यक्षता में होगी।

जलाशय का जलस्तर 518.14 मीटर तक गिर चुका है। बारिश की कमी, बढ़ती गर्मी और नहरों में लगातार पानी छोड़े जाने से उपलब्ध भंडार पर दबाव बढ़ रहा है। एक ओर किसान बारी-बंदी के बिना पानी देने और तालाब भरने की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जून 2027 तक पेयजल और ताप विद्युत संयंत्रों की जरूरतों के लिए पानी सुरक्षित रखना जरूरी है। जनप्रतिनिधियों का दबाव और किसानों के लगातार प्रदर्शन जल प्रबंधन को और चुनौतीपूर्ण बना रहे हैं।

नहरों के आखिरी छोर तक नहीं पहुंच रहा पानी

किसानों का आरोप है कि गाद सफाई और नहरों के रखरखाव में कमी से अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंचता। ऊपरी हिस्सों में अवैध पंपों से पानी खींचने और फाटक तोडक़र पानी लेने के कारण निचले इलाकों के किसान प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में पानी की उपलब्धता के साथ उसका समान वितरण भी बड़ा सवाल है।

रबी पर फिर सूखे की आशंका

फिलहाल खरीफ फसलों के लिए 20 नवंबर तक बारी-बंदी से पानी देने की योजना है। उपलब्धता के आधार पर इसे दिसंबर तक बढ़ाया जा सकता है, लेकिन इसके बाद आपूर्ति बंद होने की आशंका है। वर्ष 2015-16, 2018-19 और 2022-23 में भी रबी फसलों के लिए पानी नहीं छोड़ा गया था। किसानों को डर है कि इस बार भी इतिहास दोहराया जा सकता है।

समिति के सदस्य सचिव अभिमन्यु के अनुसार, 15 अक्टूबर की बैठक में लिए जाने वाले निर्णय के आधार पर जल प्रबंधन किया जाएगा। अब किसानों की निगाहें इसी बैठक पर टिकी हैं, जहां तय होगा कि सीमित पानी में रबी की फसलों को कितनी राहत मिलती है।

 

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By Bharat Ki Awaz

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