सातों बांधों में घटा जलभंडार, 31 अगस्त 2027 तक की चिंता
पेयजल की बर्बादी पर कार्रवाई की चेतावनी
मुंबई। कम बारिश ने मुंबई की जलापूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है। शहर को पानी देने वाले सातों बांधों के जलभंडार पर असर के बीच बृहन्मुंबई महानगरपालिका ने पानी बचाने के लिए नागरिकों से सख्ती से अपील की है। 15 मई से लागू 10 प्रतिशत पानी कटौती अब भी जारी है, जबकि औद्योगिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तथा खेल क्लबों की जलापूर्ति में 20 प्रतिशत कटौती भी बरकरार है। प्रशासन ने चेताया है कि पेयजल का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
महानगरपालिका के मुताबिक, अल नीनो और हिंद महासागर द्विध्रुव जैसी मौसमी परिस्थितियों के प्रभाव से 2026 में कम बारिश हुई। इससे बांधों में उपलब्ध जलभंडार को लंबे समय तक बनाए रखना चुनौती बन गया है। मुंबई शहर और उपनगरों को प्रतिदिन करीब 4,664 लाख लीटर पानी चाहिए, जबकि औसतन 4,100 लाख लीटर ही उपलब्ध कराया जा रहा है। यानी मांग और आपूर्ति के बीच रोजाना करीब 564 लाख लीटर का अंतर है।
2027 तक की जरूरतों पर नजर
राज्य के जल संसाधन विभाग के निर्देशों के अनुसार, 31 अगस्त 2027 तक पेयजल की जरूरतों को ध्यान में रखकर नियोजन किया जा रहा है। ऐसे में प्रशासन ने नागरिकों, आवासीय संस्थाओं, उद्योगों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों से पानी का इस्तेमाल बेहद सावधानी से करने को कहा है।
सफाई और निर्माण में पेयजल पर रोक
वाहन धोने, बगीचों में पानी डालने और सडक़ों की सफाई के लिए कुओं, बोरवेलों या उपचारित पानी का उपयोग करने की अपील की गई है। निर्माण स्थलों पर भी पेयजल के बजाय मलजल शोधन केंद्रों से प्राप्त उपचारित पानी अथवा बोरवेलों का पानी इस्तेमाल करने के निर्देश हैं। जल रिसाव रोकने के लिए विशेष दल बनाए गए हैं, जिन्हें समयबद्ध मरम्मत सुनिश्चित करने को कहा गया है।
महानगरपालिका ने साफ किया है कि उपलब्ध जलभंडार को अधिक समय तक बनाए रखने के लिए हर नागरिक का सहयोग जरूरी है। पानी की हर बूंद बचाना अब विकल्प नहीं, जरूरत है।
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