11 प्रमुख बंदरगाहों के कॉरपोरेटीकरण की तैयारी, निजीकरण की आशंका से विरोधमेंगलूरु बंदरगाह।

केंद्र का दावा—स्वामित्व सरकार के पास रहेगा

माकपा ने बताया निजीकरण की दिशा में पहला कदम

मेंगलूरु। देश के 11 प्रमुख बंदरगाहों को कॉरपोरेट ढांचे में लाने और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) बढ़ाने की केंद्र सरकार की योजना पर विवाद शुरू हो गया है। सरकार इसे बंदरगाहों की कार्यक्षमता और बुनियादी ढांचे में सुधार का कदम बता रही है, जबकि विरोधियों को आशंका है कि इसके जरिए निजी कंपनियों की भूमिका बढ़ाकर सार्वजनिक परिसंपत्तियों के निजीकरण का रास्ता खोला जा रहा है।

इस बीच, नव मेंगलूरु बंदरगाह प्राधिकरण के नौवें बर्थ के पुनर्विकास के लिए केंद्र ने 438.29 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। परियोजना को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने की योजना है।

स्वामित्व सरकार का, संचालन में निजी भागीदारी

सरकार की योजना के तहत बंदरगाहों की जमीन और प्रमुख परिसंपत्तियों का स्वामित्व सरकारी प्राधिकरणों के पास रहेगा। हालांकि, चुनिंदा बर्थ और टर्मिनलों के विकास एवं संचालन में निजी कंपनियों को निश्चित अवधि के लिए भागीदारी दी जा सकती है। इसके बदले राजस्व में हिस्सेदारी या रॉयल्टी की व्यवस्था हो सकती है। रियायत अवधि पूरी होने के बाद संबंधित परिसंपत्तियां बंदरगाह प्राधिकरण को लौटाई जाएंगी।

नौवें बर्थ के विकास पर 438 करोड़

नव मेंगलूरु बंदरगाह पर तरल माल के प्रबंधन के लिए नौवें बर्थ का पुनर्विकास किया जाएगा। इसके लिए 438.29 करोड़ रुपए की मंजूरी दी गई है। परियोजना में पीपीपी मॉडल अपनाने की योजना है।

निजीकरण का सवाल नहीं उठता

नव मेंगलूरु बंदरगाह के उप प्रबंधक एवं जनसंपर्क अधिकारी कार्तिक सालियान ने कहा कि अब तक निजीकरण का कोई प्रस्ताव सामने नहीं आया है। उनके अनुसार, कॉरपोरेट व्यवस्था का उद्देश्य बुनियादी ढांचे का विकास करना है। बंदरगाह राष्ट्रीय संपत्ति हैं और उनके निजीकरण का सवाल नहीं उठता।

माकपा ने उठाए सवाल

माकपा की राज्य समिति के सदस्य सुरेश कल्लागर ने आरोप लगाया कि कॉरपोरेटीकरण के नाम पर बंदरगाहों को निजी कंपनियों के लिए खोलने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने आशंका जताई कि यह निजीकरण की दिशा में पहला कदम साबित हो सकता है।

फिलहाल, विवाद का केंद्र निजी भागीदारी और सरकारी स्वामित्व के बीच संतुलन है। बंदरगाहों के विकास की इस योजना का वास्तविक प्रभाव निजी संचालकों को मिलने वाले अधिकारों, परियोजनाओं की शर्तों और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा पर निर्भर करेगा।

 

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By Bharat Ki Awaz

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