मंत्रियों ने फहराया तिरंगा, भाषा-संस्कृति के संरक्षण का संदेश
तुलु को अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा बनाने की घोषणा, उडुपी पूर्ण साक्षर जिला घोषित
हुब्बल्ली। कर्नाटक में रविवार को 71वां राज्योत्सव पूरे उत्साह और उल्लास के साथ मनाया गया। राजधानी से लेकर कल्याण कर्नाटक और तटीय जिलों तक आयोजित समारोहों में मंत्रियों ने ध्वजारोहण कर कन्नड़ भाषा, साहित्य, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया। विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, विभागीय झांकियों और आकर्षक परेड ने समारोहों में उत्साह भर दिया।

कन्नड़ केवल भाषा नहीं, जीवंत संस्कृति : प्रियांक खरगे
कलबुर्गी में जिला प्रभारी मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा कि कन्नड़ केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि इतिहास, विचार, साहित्य और संस्कृति की जीवंत पहचान है। उन्होंने कन्नड़ की समृद्ध साहित्यिक परंपरा और करीब दो हजार वर्ष पुराने इतिहास का उल्लेख किया। साथ ही कलबुर्गी को स्मार्ट और टिकाऊ शहर बनाने के लिए तैयार मास्टर प्लान की जानकारी देते हुए विदेशी निवेश, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता बताया। अगले दो वर्षों में योजनाओं के परिणाम दिखाई देने की उम्मीद जताई।

उडुपी पूर्ण साक्षरता जिला घोषित
उडुपी में जिला प्रभारी मंत्री रिजवान अरशद ने ध्वजारोहण कर सम्मान रक्षादल की सलामी ली। 95.53 प्रतिशत साक्षरता दर हासिल करने पर उन्होंने उडुपी को राज्य का पहला पूर्ण साक्षर जिला घोषित किया। उन्होंने समुद्री जैव प्रौद्योगिकी नीति के तहत मत्स्य महाविद्यालय में समुद्री प्रौद्योगिकी एवं नीली अर्थव्यवस्था संस्थान स्थापित करने की योजना बताई। त्रासी और मरवंते समुद्र तटों पर 7.07 एकड़ भूमि में 48 करोड़ रुपए से पर्यटन, मनोरंजन और खेल सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

तुलु को अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा का दर्जा
मेंगलूरु में जिला प्रभारी मंत्री यू.टी. खादर ने घोषणा की कि तुलु को दक्षिण कन्नड़ और उडुपी जिलों में अतिरिक्त प्रशासनिक भाषा का दर्जा दिया जाएगा। प्रतिवर्ष 18 सितंबर को तुलु दिवस के रूप में मनाने का भी निर्णय लिया गया है। उन्होंने इसे क्षेत्र के लोगों की दशकों पुरानी मांग की पूर्ति बताते हुए कहा कि इससे तुलु को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के प्रयासों को भी बल मिलेगा।
युवाओं से कन्नड़ संस्कृति अपनाने का आह्वान
कोप्पल में मंत्री शिवराज तंगडगी ने प्रशासन के सभी स्तरों पर कन्नड़ के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कन्नड़ साहित्य और ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख किया। मडिकेरी में मंत्री पी.एम. नरेंद्रस्वामी ने युवाओं से कन्नड़ भाषा, साहित्य और संस्कृति को जीवन में अपनाने का आग्रह किया।
यादगीर में मंत्री डॉ. शरणप्रकाश पाटील ने कन्नड़ को मिले आठ ज्ञानपीठ पुरस्कारों का उल्लेख करते हुए साहित्यकारों और भाषा सेवियों के योगदान को याद किया। रायचूर में मंत्री डॉ. अजय सिंह ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करने वाली प्रतिभाओं को सम्मानित किया। होसपेटे में भी राज्योत्सव पर ध्वजारोहण और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
आधी रात से बेलगावी में जश्न
बेलगावी में राज्योत्सव का उत्साह आधी रात से ही दिखाई देने लगा। चन्नम्मा सर्कल पर मेयर प्रीति ने केक काटकर समारोह की शुरुआत की। बड़ी संख्या में नागरिकों ने आतिशबाजी के साथ जश्न मनाया। बारिश की आशंका के बावजूद शहर में कन्नड़मय माहौल बना रहा।
प्रदेश के विभिन्न जिलों में आयोजित समारोहों में एक स्वर से कन्नड़ भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प व्यक्त किया गया।
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