अब स्कूलों में दिखेगा पश्चिमी घाट का जंगल, 15 मीटर की बस बनेगी चलता-फिरता संग्रहालयएआई फोटो।

कर्नाटक के सभी 31 जिलों में भ्रमण करेगी मोबाइल जैव विविधता संग्रहालय बस

3डी होलोग्राम और एआर तकनीक से दिखेंगे दुर्लभ वन्यजीव, गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने का लक्ष्य

हुब्बल्ली। पश्चिमी घाट के घने वर्षावन, झरने, दुर्लभ वनस्पतियां और वन्यजीव अब स्कूली बच्चों के बीच पहुंचेंगे। इसके लिए कर्नाटक राज्य पश्चिमी घाट संरक्षण टास्क फोर्स ने 15 मीटर लंबी बस को चलते-फिरते जैव विविधता संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है।

वेस्टर्न घाट्स ऑन व्हील्स नामक यह बस राज्य के सभी 31 जिलों का भ्रमण करेगी। इसे दुनिया का सबसे बड़ा पूर्णत: इमर्सिव मोबाइल जैव विविधता संग्रहालय बनाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने का लक्ष्य है।

बस में मिलेगा वर्षावन का अनुभव

बस के भीतर पश्चिमी घाट के प्राकृतिक वातावरण को साकार किया जाएगा। इसमें बहते झरने, शोला वनस्पतियां और जीवंत टेरारियम बनाए जाएंगे। 3डी होलोग्राफिक और ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) तकनीक से दुर्लभ वन्यजीवों को प्रदर्शित किया जाएगा। इंटरनेट आधारित कैमरों से जंगलों के वास्तविक दृश्य भी देखे जा सकेंगे। बस में 5.2 किलोवाट क्षमता के सौर पैनल लगाए जाएंगे।

छह महीने में तैयार करने का लक्ष्य

परियोजना की परिकल्पना पश्चिमी घाट संरक्षण टास्क फोर्स के अध्यक्ष मोहम्मद तबरेज आलम शरीफ ने तैयार की है। बस उपलब्ध कराने के लिए वोल्वो ग्रुप इंडिया से बातचीत चल रही है। इसके निर्माण में कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत सहयोग लिया जाएगा। करीब छह महीने में इसका डिजाइन और स्वरूप तैयार करने का लक्ष्य है।

संरक्षण के लिए अन्य पहल भी

टास्क फोर्स पश्चिमी घाट का आधिकारिक गीत जारी करने के साथ यूनेस्को, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया और भारतीय डाक विभाग के सहयोग से ट्रेजर हंट पासबुक योजना भी तैयार कर रही है। इसके अलावा मायरिस्टिका दलदली क्षेत्रों को पर्यावरण संवेदनशील क्षेत्र और जैव विविधता विरासत स्थल घोषित करने तथा पश्चिमी घाट के संरक्षण के लिए अंतरराज्यीय नीति का मसौदा तैयार करने की योजना है।

युवा पीढ़ी को प्रकृति से जोडऩा उद्देश्य

पश्चिमी घाट राज्य की पर्यावरणीय जीवनरेखा हैं। जंगलों का वास्तविक वातावरण स्कूलों तक पहुंचाकर सभी बच्चों को समान पर्यावरण शिक्षा देना और युवा पीढ़ी को प्राकृतिक संपदा के संरक्षण के लिए प्रेरित करना इस पहल का उद्देश्य है।
–मोहम्मद तबरेज आलम शरीफ, अध्यक्ष, पश्चिमी घाट संरक्षण टास्क फोर्स

प्रमुख तथ्य

– बस की लंबाई : 15 मीटर
– भ्रमण : कर्नाटक के 31 जिले
– सौर ऊर्जा क्षमता : 5.2 किलोवाट
– निर्माण की तैयारी : छह महीने
– तकनीक : 3डी होलोग्राम, एआर और आईओटी
– लक्ष्य : गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड

 

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