1.65 लाख बच्चे कन्नड़ में फेल, मातृभाषा बनी मुश्किल

एसएसएलसी नतीजों ने बढ़ाई चिंता

विशेषज्ञ समिति ने पाठ्यपुस्तकों से कठिन शब्द हटाकर सरल कन्नड़ अपनाने की सिफारिश की

हुब्बल्ली। कर्नाटक में कन्नड़ भाषा की पढ़ाई को लेकर चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने आई है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 की एसएसएलसी परीक्षा में 1.65 लाख से अधिक विद्यार्थी कन्नड़ विषय में अनुत्तीर्ण हुए। करीब सात लाख विद्यार्थियों ने कन्नड़ की परीक्षा दी थी। यानी लगभग हर 100 में 22 विद्यार्थी इस विषय में सफल नहीं हो सके। नतीजों ने पाठ्यपुस्तकों की भाषा और मौजूदा शिक्षण पद्धति पर सवाल खड़े किए हैं।

स्थिति की समीक्षा के लिए गठित विशेषज्ञ समिति ने कन्नड़ की पाठ्यपुस्तकों और भाषा शिक्षण में बदलाव की सिफारिश की है। समिति के अनुसार, पुस्तकों में ऐसे कठिन और संस्कृत मूल के शब्दों का इस्तेमाल अधिक है, जिनसे बच्चों का रोजमर्रा में परिचय नहीं होता। इससे भाषा को समझने में कठिनाई पैदा हो रही है और विद्यार्थियों की रुचि भी प्रभावित हो सकती है।

सरल भाषा पर जोर

समिति ने बच्चों की उम्र, समझ और वर्तमान सामाजिक परिवेश को ध्यान में रखते हुए पाठ्यपुस्तकों में संशोधन का सुझाव दिया है। कठिन शब्दों की जगह सरल और प्रचलित कन्नड़ शब्दों के इस्तेमाल, अनावश्यक पाठ हटाकर पुस्तकों को संक्षिप्त करने तथा समकालीन विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की सिफारिश की गई है। भाषा को बच्चों के अनुभवों से जोडऩे पर भी जोर दिया गया है।

शिक्षकों की भूमिका भी अहम

समिति ने स्पष्ट किया है कि केवल पाठ्यपुस्तकों में बदलाव पर्याप्त नहीं होगा। कन्नड़ शिक्षकों को भी नई और अधिक रोचक शिक्षण पद्धतियों का प्रशिक्षण देना जरूरी है। बच्चों के मन से भाषा को लेकर कठिनाई और झिझक दूर करने तथा सीखने की प्रक्रिया को सहज बनाने की जरूरत बताई गई है।

कन्नड़ माध्यम को रोजगार से जोडऩे का सुझाव

समिति ने कन्नड़ माध्यम से पढऩे वाले विद्यार्थियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की भी सिफारिश की है। ग्रुप-सी और ग्रुप-डी पदों पर कन्नड़ माध्यम के विद्यार्थियों को 100 प्रतिशत आरक्षण देने का सुझाव दिए जाने की बात सामने आई है।

अब चुनौती कन्नड़ की समृद्ध साहित्यिक परंपरा को बनाए रखते हुए उसे बच्चों के लिए सरल, सहज और रुचिकर बनाने की है। एसएसएलसी के आंकड़े इस बात पर गंभीरता से विचार करने का संकेत दे रहे हैं कि कहीं मातृभाषा की पढ़ाई ही विद्यार्थियों के लिए कठिन विषय तो नहीं बनती जा रही।

 

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By Bharat Ki Awaz

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