मितूर में दारुल इरशाद के तीन दिवसीय कला महोत्सव ‘फिदाक’ का समापन
115 से अधिक प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने दिखाई प्रतिभा
मितूर (दक्षिण कन्नड़)। एस.पी. हम्जा सकाफी बंटवाल ने कहा कि केवल किताबें पढऩे से ही भविष्य उज्ज्वल नहीं बनता, बल्कि विद्यार्थियों को अपनी विभिन्न प्रतिभाओं को निखारने और सीखी गई अच्छी बातों को समाज तक पहुंचाने का प्रयास भी करना चाहिए।
वे मितूर स्थित दारुल इरशाद के वार्षिक कला महोत्सव ‘फिदाक’ के आठवें संस्करण में ‘फिदाक पुरस्कार’ ग्रहण करने के बाद संबोधित कर रहे थे। उन्होंने साहित्य और कला के विकास के साथ विद्यार्थियों की प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।
छह मंचों पर 115 से अधिक प्रतियोगिताएं
‘सिल्म : अनंतता की प्रतिध्वनि’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय महोत्सव का समापन 21 अक्टूबर की रात हुआ। काजी अब्दुल हमीद मुसलियार ने इसका उद्घाटन किया। महोत्सव में छह मंचों पर चार टीमों के बीच 115 से अधिक प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। विद्यार्थियों ने कला, साहित्य और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
कार्यक्रम में पुत्तूर क्षेत्र के विधायक अशोक कुमार राय सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
तिरमुजिय्या टीम ने मारी बाजी
प्रतियोगिताओं में हाफिज तेक्कार के नेतृत्व वाली तिरमुजिय्या टीम ने 644 अंक हासिल कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। उवैस काटिपल्ला के नेतृत्व वाली नसफिय्या टीम दूसरे और सुहैल नीरकट्टे के नेतृत्व वाली जुवैनिय्या टीम तीसरे स्थान पर रही।
शम्मास और हाशिर व्यक्तिगत चैंपियन
जूनियर वर्ग में शम्मास सवणूर ने सर्वाधिक अंक हासिल कर व्यक्तिगत चैंपियन का खिताब जीता। वहीं, सीनियर वर्ग में हाशिर पल्लमजलु व्यक्तिगत चैंपियन बने।
महोत्सव ने विद्यार्थियों को अपनी कला, साहित्यिक क्षमता और अन्य कौशल प्रदर्शित करने का मंच प्रदान किया। आयोजकों का उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता को बढ़ावा देने के साथ उनकी छिपी प्रतिभाओं को सामने लाना रहा।
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