ग्रामीणों ने श्रमदान और सहयोग से बांध को बनाया पुलउडुपी के बेल्मण में शांभवी नदी की बांध पर बनाया जा रहा पुल।

10 किमी का सफर घटकर होगा 3 किमी

उडुपी के बेल्मण में शांभवी नदी पर अनूठी पहल

दान जुटाकर मुंडकूर, उलेपाडी और बलुंज के ग्रामीणों ने शुरू किया निर्माण

प्रधान पुजारी रामदास आचार्य की अगुवाई में आधा काम पूरा

भारी वाहनों को छोड़ हल्के वाहनों के लिए रास्ता तैयार करने की पहल

उडुपी। वर्षों तक सरकारी दफ्तरों और जनप्रतिनिधियों से पुल की मांग करने के बाद ग्रामीणों ने आपसी सहयोग और आर्थिक योगदान से खुद रास्ता निकालने की पहल की है। बेल्मण के पास शांभवी नदी पर बने पुराने छोटे बांध को चौड़ा कर हल्के वाहनों की आवाजाही के योग्य बनाया जा रहा है। निर्माण पूरा होने पर दोपहिया वाहनों के साथ ऑटो रिक्शा, पिकअप और कारों के लिए भी रास्ता खुलने की उम्मीद है।

ग्रामीणों ने संभाली निर्माण की जिम्मेदारी

बलुंज और उलेपाडी-मुंडकूर के बीच शांभवी नदी बहती है। यहां बना पुराना बांध अब तक मुख्य रूप से पैदल आवाजाही के काम आता था। वाहन चलने योग्य रास्ता नहीं होने से ग्रामीणों को लंबा चक्कर लगाना पड़ता था। वर्षों तक मांग के बावजूद समाधान नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने दानदाताओं की मदद से निर्माण शुरू किया।

मुंडकूर श्रीदुर्गापरमेश्वरी मंदिर के प्रधान पुजारी रामदास आचार्य इस पहल की अगुवाई कर रहे हैं। व्यक्तिगत योगदान और दान के सहारे शुरू हुए काम का करीब आधा हिस्सा पूरा हो चुका है।

10 किमी का चक्कर घटकर तीन किमी

उलेपाडी से मुंडकूर के बाजार, स्कूल, डाकघर और अन्य सुविधाओं तक पहुंचने के लिए ग्रामीणों को एलिंजे-पट्टे क्रॉस मार्ग से 10 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करनी पड़ती थी। नदी में पानी बढऩे पर नाव से आवाजाही का सहारा लेना पड़ता था।

ग्रामीणों की इस पहल से दोनों क्षेत्रों के बीच दूरी घटकर करीब तीन किलोमीटर रह जाने की उम्मीद है। इससे विद्यार्थियों, व्यापारियों और रोजाना आने-जाने वाले लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है। नदी के दोनों ओर स्थित मुंडकूर श्रीदुर्गापरमेश्वरी मंदिर और श्रीउमामहेश्वर महागणपति मंदिर के बीच संपर्क भी आसान होगा।

पुराने बांध को चौड़ा कर रहे ग्रामीण

पुराने बांध पर दोपहिया वाहनों के गुजरने लायक जगह थी, लेकिन कार और ऑटो रिक्शा के लिए पर्याप्त चौड़ाई नहीं थी। अब इसके समानांतर अतिरिक्त हिस्सा तैयार किया जा रहा है। इसके लिए मजबूत आधार और खंभे बनाकर मोटे स्लैब लगाए जा रहे हैं।

निर्माण पूरा होने के बाद भारी वाहनों को छोडक़र हल्के वाहनों की आवाजाही संभव होने की उम्मीद है। हालांकि, रास्ते के उपयोग से पहले इसकी संरचनात्मक मजबूती की तकनीकी जांच और संबंधित अधिकारियों की आवश्यक अनुमति सुनिश्चित करना जरूरी होगा।

 

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By Bharat Ki Awaz

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