आजीवन कारावास के बाद बढ़ी अयोग्यता की आशंका
जनप्रतिनिधित्व कानून से बचने की कानूनी जंग तेज
योगीश गौड़ा हत्याकांड ने फिर पकड़ी रफ्तार
हुब्बल्ली. कर्नाटक की राजनीति में सनसनी मचाने वाले योगीश गौड़ा गौडर हत्याकांड ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। कांग्रेस नेता और धारवाड़ ग्रामीण क्षेत्र के विधायक विनय कुलकर्णी को 17 अप्रेल 2026 को जनप्रतिनिधियों की विशेष अदालत ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्हें परप्पन अग्रहारा जेल भेज दिया गया।
विधायक पद पर मंडराया खतरा
भारतीय जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के अनुसार, किसी भी जनप्रतिनिधि को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा होने पर उसकी सदस्यता तत्काल समाप्त हो जाती है। इसी प्रावधान के तहत विनय कुलकर्णी का विधायक पद जाना लगभग तय माना जा रहा है। इस स्थिति से बचने के लिए उन्होंने कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
हाईकोर्ट में त्वरित राहत की मांग
विनय कुलकर्णी ने अपने वकीलों के माध्यम से निचली अदालत के फैसले और सजा पर तत्काल रोक लगाने की मांग करते हुए अपील दायर की है। उनके साथ सह-आरोपी चंद्रशेखर इंडी ने भी इसी प्रकार की याचिका दाखिल की है। सूत्रों के अनुसार, सोमवार को इस याचिका पर तात्कालिक सुनवाई हो सकती है।
सीबीआई जांच और सजा का आधार
यह मामला 15 जून 2016 का है, जब धारवाड़ के एक जिम में योगीश गौड़ा की निर्मम हत्या कर दी गई थी। वर्ष 2019 में यह केस केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपा गया था। जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत ठोस साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने विनय कुलकर्णी को दोषी ठहराया।
राजनीतिक भविष्य दांव पर
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट का फैसला विनय कुलकर्णी के राजनीतिक करियर के लिए निर्णायक साबित होगा। यदि अदालत से राहत नहीं मिलती है, तो उनकी विधायक सदस्यता समाप्त होना तय है।
न्यायालय के अधीन कानूनी प्रक्रिया
सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारी (नाम उजागर नहीं) ने कहा कि हमने अदालत में पुख्ता साक्ष्य पेश किए थे, जिनके आधार पर यह फैसला आया है। आगे की कानूनी प्रक्रिया न्यायालय के अधीन है।
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