लक्कुंडी में उपग्रह तकनीक से खोजे जाएंगे प्राचीन मंदिर और बावडिय़ां

यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की तैयारी

2026 तक 101 मंदिर और 101 बावडिय़ों का लक्ष्य

लक्कुंडी. कर्नाटक सरकार ऐतिहासिक लक्कुंडी क्षेत्र की प्राचीन धरोहरों को नए रूप में दुनिया के सामने लाने की तैयारी में जुट गई है। पर्यटन मंत्री एच.के. पाटिल ने कहा कि उपग्रह इमेजिंग तकनीक की मदद से लक्कुंडी में मौजूद 101 मंदिर और 101 बावडिय़ों की खोज कर उन्हें सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया जाएगा।

बेंगलूरु स्थित विधान सौधा में आयोजित बैठक में उन्होंने बताया कि यह कार्य राष्ट्रीय उन्नत अध्ययन संस्थान (एनआईएएस) के सहयोग से किया जाएगा। वर्ष 2023 से अब तक लक्कुंडी में 32 मंदिर, 28 बावडिय़ां और 7 अन्य स्मारकों सहित 70 से अधिक धरोहरों की पहचान की जा चुकी है। सरकार ने 31 दिसंबर 2026 तक 101 बावडिय़ों और 101 मंदिरों को खोजकर संरक्षित रूप में प्रस्तुत करने का लक्ष्य तय किया है।

मंत्री ने बताया कि लक्कुंडी को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराने की प्रक्रिया भी जारी है। नवंबर 2024 में शुरू किए गए पुरातात्विक अन्वेषण के पहले चरण में 1500 से अधिक पुरावशेष मिले थे। वहीं मई 2026 से चल रहे दूसरे चरण में अब तक 1800 से अधिक अवशेष खोजे जा चुके हैं। जून 2026 तक कुल 5000 से अधिक पुरावशेष मिलने की संभावना जताई गई है, जिन्हें खुले संग्रहालय में प्रदर्शित करने की योजना है।

बैठक में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के पूर्व अध्यक्ष डॉ. किरण कुमार ने कहा कि लक्कुंडी को विश्व धरोहर सूची में शामिल करना अत्यंत आवश्यक है और उपग्रह तकनीक के माध्यम से प्राचीन संरचनाओं की खोज का प्रयास सराहनीय है।

इस अवसर पर एनआईएएस के प्रोफेसर एम.बी. रजनी ने सैटेलाइट तकनीक के उपयोग पर प्रस्तुति दी, जबकि लक्कुंडी धरोहर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने अब तक की प्रगति का ब्यौरा प्रस्तुत किया।

 

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By Bharat Ki Awaz

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