सितंबर में ही तपने लगी तटीय धरती, 29 प्रतिशत बारिश कमसितंबर में ही तपने लगी तटीय धरती, 29 प्रतिशत बारिश कम

अल नीनो का असर

दक्षिण कन्नड़ में सामान्य से भारी कमी

धान की फसल पर भी संकट, कमजोर हो रही जलधाराएं

मेंगलूरु। आमतौर पर बारिश के लिए पहचाने जाने वाले तटीय कर्नाटक में इस बार सितंबर में ही मौसम का मिजाज बदल गया है। दक्षिण कन्नड़ में सामान्य से 29 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। बारिश की कमी का असर खेतों से लेकर जलस्रोतों तक दिखाई देने लगा है। धान की फसल, जिसे अगस्त-सितंबर की पर्याप्त बारिश की जरूरत होती है, भी प्रभावित होने की बात सामने आई है।

जिले में सितंबर अंत तक सामान्य बारिश 3,528 मिमी मानी जाती है, जबकि इस वर्ष अब तक करीब 2,505.9 मिमी बारिश दर्ज हुई है। यानी करीब 29 प्रतिशत कमी। केंद्र सरकार के सूखा प्रबंधन मानकों के अनुसार 33 प्रतिशत या उससे अधिक बारिश की कमी होने पर सूखे की स्थिति मानी जाती है। ऐसे में यदि आगामी बारिश कमजोर रही तो दक्षिण कन्नड़ पर सूखे का खतरा बढ़ सकता है।

कहां कितनी बारिश

जिले के कई हिस्सों में बारिश की कमी दर्ज की गई है। बेल्तंगड़ी में 1,345 मिमी, बंटवाल में 1,189 मिमी, मेंगलूरु में 1,225 मिमी, पुत्तूर में 1,496 मिमी, मूडबिद्री में 1,123 मिमी, कडबा में 561 मिमी, मुल्की में 1,518 मिमी और उल्लाल में 1,033 मिमी बारिश दर्ज हुई। बेल्तंगड़ी, मेंगलूरु और मुल्की में कमी विशेष रूप से चिंता बढ़ा रही है।

नदी-नालों की जलधारा भी कमजोर

सामान्य वर्षों में जून से अगस्त के बीच कई दौर में तेज बारिश से तटीय इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनती है। इस बार केवल एक प्रमुख बाढ़ की स्थिति बनी। अगस्त में होने वाली लगातार रिमझिम बारिश भी कमजोर रही, जिससे भूजल और प्राकृतिक जलधाराओं पर असर पडऩे लगा है।

धान का रंग बदला, उत्पादन पर असर

अगस्त-सितंबर में पर्याप्त बारिश नहीं होने से धान की फसल पर असर पड़ा है। किसानों के अनुसार हरे-भरे खेतों में अब पीलापन दिखाई दे रहा है। पौधों में अपेक्षित बढ़वार और बालियों का विकास भी प्रभावित हुआ है। स्थानीय स्तर पर इस बार धान की पैदावार सामान्य से 40-50 प्रतिशत तक कम रहने की आशंका जताई जा रही है।

संभावित सूखे की तैयारी शुरू करे प्रशासन

75 साल की उम्र में मैंने इस तरह की बारिश की कमी नहीं देखी। सितंबर में ही जमीन तप रही है और धान की फसल प्रभावित हो गई है। यदि आगे पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो दिसंबर के बाद स्थिति और गंभीर हो सकती है। प्रशासन को अभी से संभावित सूखे की तैयारी शुरू करनी चाहिए।
गोपालकृष्ण भंडारी, प्रगतिशील किसान, नीरुमार्ग

आंकड़े

29 प्रतशत — दक्षिण कन्नड़ में बारिश की कमी
3,528 मिमी — सामान्य बारिश
2,505.9 मिमी — इस साल अब तक
40-50 प्रतिशत — धान उत्पादन में संभावित कमी
33 प्रतिशत — सूखा मानक की बारिश कमी की सीमा

 

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