उडुपी में 15 दिन में सिर्फ 4.2 सेमी बारिश
बारिश की कमी से धान की उपज पर मंडराया संकट
जून-जुलाई में देरी के बाद अब बालियां निकलने के निर्णायक चरण में सूखे जैसे हालात
जिले में धान बुवाई का लक्ष्य 37,742 हेक्टेयर, अब तक 27,673 हेक्टेयर में ही बुवाई
सितंबर में तापमान 33 डिग्री तक पहुंचा
उडुपी। मानसून की शुरुआत में बारिश की कमी से पहले ही करीब एक महीने देरी से धान की खेती शुरू करने वाले किसानों की मुश्किलें अब और बढ़ गई हैं। धान में बालियां निकलने और दाने भरने के निर्णायक चरण में बारिश ने एक बार फिर मुंह मोड़ लिया है। सितंबर के दूसरे सप्ताह से बारिश लगभग गायब है और खेतों में नमी घटने लगी है। इससे धान की उपज प्रभावित होने की आशंका किसानों को सताने लगी है।
जून-जुलाई में बारिश कम होने से जिले के कई हिस्सों में धान की खेती का काम करीब एक महीने पिछड़ गया था। अगस्त की शुरुआत में हुई अच्छी बारिश से किसानों को कुछ राहत मिली थी, लेकिन अब फिर बारिश का लंबा अंतराल शुरू हो गया है।
बालियां निकलने के वक्त बारिश की सबसे ज्यादा जरूरत
धान की फसल में बालियां निकलना और दाने भरना बेहद संवेदनशील चरण माना जाता है। इस दौरान खेत में पर्याप्त नमी नहीं होने पर बालियों का आकार छोटा रह सकता है, फूलों के विकास पर असर पड़ सकता है और दाने पूरी तरह नहीं भरने की स्थिति बन सकती है। इसका सीधा असर उपज पर पड़ सकता है।
जिले के कई खेतों में बालियां निकलनी शुरू हो गई हैं, जबकि कुछ जगह फसल पकने की अवस्था में पहुंच चुकी है। ऐसे में किसानों की नजर अब आसमान पर टिकी है।
एमओ-4 धान की फसल को लेकर चिंता
उडुपी जिले में बड़ी संख्या में किसान एमओ-4 किस्म का धान उगाते हैं। इस किस्म में बालियां निकलने के समय खेत में पर्याप्त पानी या नमी रहना फसल के बेहतर विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। समय पर हल्की बारिश मिलने से अच्छी उपज की उम्मीद रहती है।
इस बार सितंबर में अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। बारिश की कमी के साथ बढ़ता तापमान भी धान की फसल के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।
लक्ष्य के मुकाबले सिर्फ 73 फीसदी बुवाई
इस वर्ष जिले में 37,742 हेक्टेयर में धान की बुवाई का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन अब तक 27,673 हेक्टेयर में ही बुवाई हो सकी है। यानी लक्ष्य का करीब 73 प्रतिशत ही हासिल हुआ है।
शुरुआत में बारिश की कमी के कारण कृषि गतिविधियां पिछड़ गई थीं। अगस्त में हुई बारिश से फसल को कुछ राहत मिली, लेकिन अब बालियां निकलने के चरण में फिर बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
बारिश पर निर्भर किसानों की बढ़ी मुश्किल
कुओं या अन्य जलस्रोतों की सुविधा वाले किसान पंपसेट से खेतों में पानी पहुंचाकर फसल बचा सकते हैं। लेकिन बारिश पर निर्भर ऊंचाई वाले खेतों और अन्य क्षेत्रों के किसानों के पास यह विकल्प नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों की बारिश ही उनकी फसल के लिए निर्णायक साबित होगी।
कुंदापुर के सहायक कृषि निदेशक सचिन हेगड़े के अनुसार, बालियां निकलने और दाने भरने के समय खेत में पर्याप्त नमी जरूरी है। फिलहाल फसल में बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन बारिश नहीं हुई तो उपज पर कुछ असर पडऩे की संभावना है। इस चरण में सामान्य तौर पर दो बारिश हो जाएं तो फसल की स्थिति बेहतर रहती।
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