एमएसपी पर सरकारी खरीद के बावजूद भुगतान नहीं
सूखे और महंगाई के बीच किसानों पर बढ़ा आर्थिक बोझ
जल्द भुगतान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी
चिक्कमगलूरु। कर्नाटक के किसानों पर सूखे की मार के बीच अब सरकारी भुगतान में देरी का बोझ भी बढ़ गया है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) योजना के तहत रागी बेचने के करीब छह माह बाद भी 14 जिलों के 25,413 किसानों को 265 करोड़ रुपए का भुगतान नहीं हुआ है। किसान संगठनों ने सरकार से तत्काल राशि खातों में जमा कराने की मांग की है।
राज्य के 190 तालुकों में से 101 तालुक सूखे की चपेट में बताए जा रहे हैं। कई क्षेत्रों में पेयजल संकट भी गहरा गया है। ऐसे हालात में रागी की बिक्री की राशि नहीं मिलने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है।
2.46 लाख किसानों से हुई खरीद
केंद्र सरकार ने वर्ष 2025-26 में कर्नाटक से 6 लाख मीट्रिक टन रागी खरीदने की अनुमति दी थी। इसके तहत 15 जिलों के 2,46,605 किसानों ने खरीद केंद्रों के माध्यम से प्रति क्विंटल 4,886 रुपए की दर से कुल 5,69,331 मीट्रिक टन रागी सरकारी एजेंसियों को बेची।
सरकार के अनुसार, अब तक करीब 2.21 लाख किसानों को भुगतान किया जा चुका है। लेकिन 25,413 किसानों की 265 करोड़ रुपए की राशि अभी भी बकाया है।
मार्च में बेचा, अब तक नहीं मिला पैसा
किसानों ने बताया कि उन्होंने पिछले मार्च में खरीद केंद्रों पर रागी बेची थी। व्यापारियों को कम कीमत पर फसल बेचने के बजाय सरकारी एमएसपी मिलने की उम्मीद में किसान खरीद केंद्रों पर पहुंचे थे। उन्हें जल्द भुगतान की उम्मीद थी, लेकिन छह माह गुजरने के बाद भी राशि खातों में नहीं आई।
इस बार बारिश की कमी से वैकल्पिक फसलें भी अपेक्षित उत्पादन नहीं दे सकीं। ऐसे में रागी की बकाया राशि भी नहीं मिलने से किसानों की आर्थिक मुश्किल बढ़ गई है।
केआरएस पार्टी के राज्य संयुक्त सचिव जीवन ने कहा कि एमएसपी पर रागी बेचने वाले किसानों को छह माह बाद भी भुगतान नहीं मिलना गंभीर मामला है। उन्होंने चेतावनी दी कि दो-चार दिन में बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया तो किसान आंदोलन शुरू करेंगे।
बकाया का आंकड़ा
जिला — किसान — बकाया राशि
तुमकूरु — 10,146 — 103.88 करोड़ रुपए
हासन — 5,440 — 56.39 करोड़ रुपए
मैसूरु — 2,648 — 26.62 करोड़ रुपए
चिक्कमगलूरु — 2,499 — 27.20 करोड़ रुपए
चित्रदुर्ग — 2,109 — 23.98 करोड़ रुपए
मंड्या — 2,074 — 22.45 करोड़ रुपए

