371जे का ‘वरदान’ बना पदोन्नति का ग्रहण!371जे का ‘वरदान’ बना पदोन्नति का ग्रहण!

13 साल बाद भी कल्याण कर्नाटक के कर्मचारियों की वरिष्ठता बेअसर

स्थानीय कर्मचारी कनिष्ठ रह गए, दूसरे जिलों के कनिष्ठ कर्मचारी पहुंच रहे सीनियर ग्रेड पदों पर

कलबुर्गी। पिछड़ेपन को दूर करने और कल्याण कर्नाटक के लोगों को सरकारी नौकरियों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से लागू किया गया संविधान का अनुच्छेद 371जे अब इसी क्षेत्र के सरकारी कर्मचारियों के लिए पदोन्नति में परेशानी का कारण बनता नजर आ रहा है। विशेष दर्जा लागू हुए 13 वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन पदोन्नति की व्यवस्था में बनी विसंगति दूर नहीं हो पाई है। कर्मचारियों का आरोप है कि इसका खामियाजा सबसे अधिक कल्याण कर्नाटक के वरिष्ठ कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है।

स्थिति यह है कि वरिष्ठता सूची में ऊपर होने के बावजूद कल्याण कर्नाटक के कर्मचारी पदोन्नति से वंचित रह जाते हैं, जबकि दूसरे जिलों से आए उनसे कनिष्ठ कर्मचारी पहले पदोन्नत होकर सीनियर ग्रेड के पद हासिल कर लेते हैं। इससे कर्मचारियों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ रही है।

दो वरिष्ठता सूचियों ने बढ़ाई उलझन

सरकारी कर्मचारियों की पदोन्नति प्रक्रिया में पहले कर्मचारियों से 371जे का लाभ लेने संबंधी विकल्प लिया जाता है। कल्याण कर्नाटक के कर्मचारी स्वाभाविक रूप से विशेष दर्जे का लाभ लेने के लिए इस श्रेणी का चयन करते हैं। इसके बाद संबंधित विभागों में कल्याण कर्नाटक और गैर-कल्याण कर्नाटक के लिए अलग-अलग वरिष्ठता सूचियां तैयार की जाती हैं।

यहीं से पदोन्नति की विसंगति सामने आती है। कर्मचारियों के अनुसार, कल्याण कर्नाटक के ‘सी’ ग्रेड कर्मचारी को ‘बी’ ग्रेड पद पर पदोन्नति के लिए कल्याण कर्नाटक कोटे में उपलब्ध करीब 75 प्रतिशत पदों में ही अवसर मिलता है। वहीं, संबंधित विभागों में गैर-कल्याण कर्नाटक के कर्मचारियों की संख्या महज 5 से 6 प्रतिशत होने के बावजूद उनके लिए करीब 20 से 25 प्रतिशत पद उपलब्ध रहते हैं।

कम संख्या, अधिक पद का समीकरण

कर्मचारियों का कहना है कि गैर-कल्याण कर्नाटक के कर्मचारियों की संख्या कम होने के कारण उनके हिस्से में उपलब्ध पदों के मुकाबले दावेदार भी कम रहते हैं। ऐसे में वे अपेक्षाकृत जल्दी पदोन्नति हासिल कर लेते हैं। दूसरी ओर, कल्याण कर्नाटक के कर्मचारियों की संख्या अधिक होने के कारण 75 प्रतिशत पदों के भीतर ही अधिक कर्मचारियों के बीच प्रतिस्पर्धा होती है।

नतीजा यह कि कल्याण कर्नाटक का कर्मचारी वरिष्ठ होकर भी कनिष्ठ पद पर रह जाता है, जबकि दूसरे क्षेत्र का उससे कनिष्ठ कर्मचारी पदोन्नत होकर सीनियर ग्रेड में पहुंच जाता है।

शिक्षा-भर्ती में लाभ, पदोन्नति में नुकसान?

कर्मचारियों का कहना है कि 371जे का प्रावधान शिक्षा और नई सरकारी भर्तियों में स्थानीय लोगों के लिए अवसर सुनिश्चित करने में प्रभावी साबित हो रहा है। लेकिन सरकारी सेवा में पहले से कार्यरत कर्मचारियों के मामले में यही व्यवस्था पदोन्नति को प्रभावित कर रही है।

कर्मचारी सवाल उठा रहे हैं कि जिस विशेष दर्जे को क्षेत्रीय पिछड़ेपन को दूर करने और स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा के लिए लागू किया गया था, वह उनकी सेवा में वरिष्ठता और पदोन्नति के रास्ते में बाधा क्यों बन रहा है?

कर्मचारियों ने सरकार से पदोन्नति संबंधी नियमों की समीक्षा कर ऐसी व्यवस्था बनाने की मांग की है, जिससे 371जे का लाभ भी बना रहे और वरिष्ठता के आधार पर पात्र कर्मचारियों को पदोन्नति से वंचित भी न होना पड़े।

 

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By Bharat Ki Awaz

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