2023-24 में 77,482 से घटकर 2025-26 में 6,725 रह गए गंभीर कुपोषित बच्चे
पोषण आहार और डिजिटल निगरानी का असर
हुब्बल्ली। कर्नाटक में बच्चों में गंभीर कुपोषण के मामलों में पिछले दो वर्षों के दौरान उल्लेखनीय कमी आई है। वर्ष 2023-24 में राज्य में 77,482 बच्चे गंभीर कुपोषण से प्रभावित थे, जो कुल बच्चों का 2.64 प्रतिशत था। 2025-26 में यह संख्या घटकर 6,725 यानी मात्र 0.23 प्रतिशत रह गई।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार, आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से नियमित पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराने के साथ ही ‘पोषण ट्रैकर’ डिजिटल व्यवस्था से बच्चों की ऊंचाई और वजन की नियमित निगरानी की जा रही है। इससे कुपोषित बच्चों की शुरुआती स्तर पर पहचान कर समय पर उपचार संभव हुआ है।
मध्यम कुपोषण में भी 50 प्रतिशत से अधिक कमी
मध्यम कुपोषण के मामलों में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 2023-24 में 1.55 लाख यानी 5.27 प्रतिशत बच्चे मध्यम कुपोषण की श्रेणी में थे। 2025-26 में यह संख्या घटकर करीब 72 हजार यानी 2.44 प्रतिशत रह गई।
गंभीर कुपोषित बच्चों को चिन्हित कर पोषण पुनर्वास केंद्रों में भेजा जाता है, जहां उन्हें विशेष चिकित्सा उपचार और पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराया जाता है।
ठिगनेपन और कम वजन में भी सुधार
पोषण ट्रैकर के आंकड़ों के अनुसार, गंभीर ठिगनेपन के मामले 21 प्रतिशत से घटकर 12.57 प्रतिशत तथा मध्यम ठिगनेपन के मामले 20.10 प्रतिशत से घटकर 16.36 प्रतिशत रह गए हैं। गंभीर रूप से कम वजन वाले बच्चों का अनुपात भी 4.24 से घटकर 2.11 प्रतिशत तथा मध्यम कम वजन वाले बच्चों का अनुपात 16 से घटकर 11.53 प्रतिशत हुआ है।
69,922 आंगनबाड़ी केंद्रों से 46 लाख लाभार्थी
राज्य में 69,922 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनके माध्यम से 0-6 वर्ष के बच्चों के साथ गर्भवती और धात्री महिलाओं समेत करीब 46 लाख लाभार्थियों को पोषण सेवाएं दी जा रही हैं। सामान्य बच्चों को दूध, पौष्टिक लड्डू, अंडे तथा दोपहर में भोजन दिया जाता है। गंभीर कुपोषित बच्चों को सप्ताह में छह दिन अंडे के साथ अतिरिक्त पोषण और आवश्यक औषधोपचार उपलब्ध कराया जाता है।
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