पंचमसाली गुरुपीठ में हिसाब विवाद गहराया,
स्वामी वचनानंद का बैठक बहिष्कार, ट्रस्टियों पर गंभीर सवाल
हंगामे के बीच पुलिस को संभालनी पड़ी स्थिति
दावणगेरे. जिले के हरिहर स्थित वीरशैव लिंगायत पंचमसाली गुरुपीठ में आय-व्यय के लेखे-जोखे को लेकर विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। सोमवार को आयोजित बैठक में उस समय तनाव चरम पर पहुंच गया, जब वचनानंद स्वामी ने ट्रस्टियों द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले हिसाब पर सवाल उठाते हुए बैठक का बहिष्कार कर दिया।
“कृष्ण का नहीं, राम जैसा हिसाब चाहिए”
स्वामी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अपारदर्शी लेखा उन्हें स्वीकार नहीं है। “हमें ‘कृष्ण का हिसाब’ नहीं, बल्कि ‘भगवान राम जैसा स्पष्ट और पारदर्शी हिसाब’ चाहिए।” उन्होंने वर्ष 2008 से अब तक के सभी आय-व्यय का विस्तृत विवरण पुस्तकरूप में सार्वजनिक करने की मांग रखी।
ट्रस्टियों पर सीधा आरोप
स्वामी ने ट्रस्टियों पर निशाना साधते हुए कहा कि वे किसी भी स्थिति में मठ नहीं छोड़ेंगे। मठ हम नहीं छोड़ेंगे, ट्रस्टियों को ही सम्मानपूर्वक हटना चाहिए। उनके अनुसार यह आंदोलन भक्तों की मांग पर चल रहा है और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा।
बैठक में हंगामा, पुलिस हस्तक्षेप
बैठक के दौरान स्वामी समर्थक और ट्रस्टी पक्ष के बीच जमकर नारेबाजी हुई, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। लेखा दस्तावेज मंच पर लाने के दौरान स्थिति और बिगड़ गई। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई।
समयसीमा और बयान पर विवाद
इस बीच एक प्रमुख नेता ने आरोप लगाया कि 10 मार्च को दिए गए उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने महाभारत के “अश्वत्थामा हत: कुंजरो:” प्रसंग का हवाला देते हुए कहा कि उनके बयान का केवल एक हिस्सा वायरल किया गया, जिससे भ्रम पैदा हुआ। उन्होंने याद दिलाया कि पहले एक सप्ताह की समयसीमा तय हुई थी, जिसे बाद में 24 तारीख तक बढ़ाया गया, लेकिन तब भी स्पष्ट हिसाब नहीं दिया गया।
जमीन विवाद और नए आरोप
पांच एकड़ जमीन को लेकर भी विवाद गहराता दिख रहा है। संबंधित पक्ष का कहना है कि जमीन दान में नहीं, बल्कि 5 लाख रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से खरीदने का समझौता किया गया था, जो बाद में तकनीकी कारणों से अधूरा रह गया।
भक्तों का बैठक से दूरी बनाना
स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बैठक शुरू होने से पहले ही बड़ी संख्या में भक्त स्थल छोडक़र चले गए। अपेक्षा से कम उपस्थिति ने पूरे घटनाक्रम को और भी संवेदनशील बना दिया।
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