हल्लिगेरी में 63 प्रजातियों की खोजहुब्बल्ली के प्रसिद्ध नेत्र विशेषज्ञ डॉ. सतीश हल्लिकेरी द्वारा कैमरे में कैद दुर्लभ मकड़ी की प्रजाति।

दो दिवसीय जन-विज्ञान अभियान में 35 से अधिक कीट और 28 से ज्यादा मकड़ी प्रजातियां दर्ज

हुब्बल्ली। धारवाड़ के हल्लिगेरी स्थित नेचर फर्स्ट इको विलेज में आयोजित दो दिवसीय जन-विज्ञान क्षेत्र कार्यशाला में 63 प्रजातियों की जैवविविधता दर्ज की गई। धारवाड़ नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी के नेचर रिसर्च सेंटर की ओर से 22 और 23 अगस्त को आयोजित इस अभियान में 35 से अधिक विज्ञानप्रेमियों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।

दो दिन में जैवविविधता का दस्तावेजीकरण

पुणे स्थित एंटोमैन इंस्टीट्यूट ऑफ इनवर्टिब्रेट जूलॉजी के संस्थापक एवं निदेशक तथा प्रसिद्ध कीट विज्ञानी ईशान पाहाड़े और मकड़ी विशेषज्ञ अथर्व कुलकर्णी के नेतृत्व में विशेषज्ञों की टीम ने प्रतिभागियों के साथ मिलकर 35 से अधिक कीट और 28 से अधिक मकड़ी प्रजातियों की पहचान कर उनका दस्तावेजीकरण किया।

प्रतिभागियों को आइ-नेचुरलिस्ट ऐप के माध्यम से स्थानीय जैवविविधता की पहचान और वैज्ञानिक तरीके से उसके रिकॉर्ड तैयार करने का प्रशिक्षण भी दिया गया। आयोजकों के अनुसार, इन अभिलेखों से जैवविविधता संरक्षण तथा जन-विज्ञान के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध होंगे।

दुर्लभ प्रजातियों के लिए विशेष उद्यान

इस अभियान को हल्लिगेरी में जैवविविधता संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वरिष्ठ पर्यावरणविद् पंचाक्षरी हिरेमठ के नेतृत्व में एंटोमैन इंस्टीट्यूट ने हल्लिगेरी में दुर्लभ तितलियों, पतंगों, मकडिय़ों, मधुमक्खियों और अन्य कीटों के संरक्षण के लिए विशेष उद्यान विकसित करने को लेकर समझौते पर हस्ताक्षर किए।

कार्यशाला में डॉ. धीरज वीरनगौडर, कृष्णकुमार भागवत और आर.जी. तिम्मापुर सहित कलकेरी संगीत विद्यालय एवं बालबलग विद्यालय के विज्ञान शिक्षक और विद्यार्थी शामिल हुए। जन-विज्ञान प्रचारक हर्षवर्धन शीलवंत ने कार्यशाला का समन्वय किया।

 

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By Bharat Ki Awaz

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