वायुक्षेत्र प्रतिबंध से संकट; जून-जुलाई तक उड़ानों में कटौती का निर्णय
नई दिल्ली: देश की प्रमुख विमानन कंपनी एयर इंडिया ने बढ़ती लागत और वैश्विक परिस्थितियों के दबाव के चलते अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती करने का फैसला किया है। कंपनी ने घोषणा की है कि जून और जुलाई तक कई अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर उड़ानों की संख्या कम की जाएगी।
ईंधन कीमतों ने बढ़ाई मुश्किल
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण विमान ईंधन की कीमतों में भारी वृद्धि हुई है। इसके साथ ही कई देशों के वायुक्षेत्र पर लगे प्रतिबंधों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। परिणामस्वरूप विमानों को लंबा मार्ग अपनाना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत और परिचालन लागत दोनों में तेज़ी से वृद्धि हो रही है।
प्रबंधन का स्पष्ट बयान
कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में उड़ानों के समय-सारणी में कटौती के अलावा हमारे पास कोई विकल्प नहीं है। लागत लगातार बढ़ रही है और कई अंतरराष्ट्रीय सेवाएं घाटे में चल रही हैं।
यात्रियों की मांग पर असर
विल्सन ने कहा कि ईंधन महंगा होने के कारण टिकट दरों में वृद्धि और अतिरिक्त शुल्क लगाए गए हैं, लेकिन इसका सीधा असर यात्रियों की मांग पर पड़ा है। यात्री महंगे किराए के कारण यात्रा टाल रहे हैं, ऐसे में हम अनियंत्रित रूप से किराया नहीं बढ़ा सकते।
पहले भी की गई थी कटौती
गौरतलब है कि कंपनी अप्रेल और मई में भी कुछ उड़ानों में कमी कर चुकी है। हालांकि, मौजूदा संकट जारी रहने के कारण अब जून और जुलाई में भी यह कटौती जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
आगे की उम्मीदें
कंपनी को उम्मीद है कि पश्चिम एशिया की स्थिति जल्द सामान्य होगी और होरमुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण मार्ग फिर से पूरी तरह खुल जाएंगे। इसके बाद उड़ान सेवाएं धीरे-धीरे सामान्य स्तर पर लौट सकती हैं।
पुनर्गठन पर पड़ा असर
टाटा समूह के अधिग्रहण के बाद एयर इंडिया को नई दिशा देने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन वैश्विक संकट और बढ़ती लागत ने इस प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। फिर भी कंपनी प्रबंधन को भरोसा है कि परिस्थितियां सुधरने पर सेवाएं फिर से पटरी पर आ जाएंगी।
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