व्यापार समझौता उल्लंघन का आरोप; ईरान मुद्दे पर समर्थन न मिलने से बढ़ा टकराव
वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने यूरोपीय देशों से आयात होने वाली कारों और ट्रकों पर 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने की घोषणा कर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में नया विवाद खड़ा कर दिया है। यह निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में यूरोपीय सहयोग की कमी को लेकर अमेरिका असंतुष्ट है।
शुल्क बढ़ाने का कारण
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यूरोपीय संघ ने अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते का पूरी तरह पालन नहीं किया है। उन्होंने अपने वक्तव्य में स्पष्ट कहा कि यदि यूरोप हमारे देश में ही अपने वाहन बनाए, तो उन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, लेकिन आयातित वाहनों पर सख्ती जरूरी है।
पूर्व में हुए समझौते के अनुसार यूरोपीय वाहनों पर शुल्क 15 प्रतिशत तक सीमित था, जिसे अब बढ़ाकर 25 प्रतिशत कर दिया गया है।
जर्मनी पर पड़ेगा सबसे अधिक असर
विश्लेषकों के अनुसार यह कदम मुख्य रूप से जर्मनी को ध्यान में रखकर उठाया गया है, क्योंकि यूरोप से अमेरिका को निर्यात होने वाले वाहनों में जर्मनी की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के साथ हालिया बयानबाजी ने भी इस निर्णय को और तेज किया है।
यूरोपीय प्रतिक्रिया तीखी
यूरोपीय संसद की व्यापार समिति के अध्यक्ष बर्न्ड लांगे ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका का यह निर्णय अस्वीकार्य है। यह दिखाता है कि वह अपने सहयोगियों के प्रति भरोसेमंद नहीं रहा। निकट साझेदारों के साथ ऐसा व्यवहार उचित नहीं है।
चीन की कंपनी पर भी कार्रवाई
इसी क्रम में अमेरिका ने चीन की तेल कंपनी चिंगदाओ हाइये ऑयल टर्मिनल कंपनी लिमिटेड पर भी प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। अमेरिका का आरोप है कि कंपनी ने होरमुज जलडमरूमध्य के माध्यम से ईरान से बड़ी मात्रा में तेल खरीदा और वहां लगाए गए शुल्क का भुगतान किया।
वैश्विक असर की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम केवल व्यापारिक नहीं बल्कि रणनीतिक दबाव बनाने का प्रयास है, जिससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों और वैश्विक बाजार पर व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
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