50 अरब डॉलर का उत्पादन ठप
असर महीनों नहीं वर्षों तक रहने की आशंका
लंदन. लंदन से सामने आए विश्लेषण में पश्चिम एशिया के हालिया संघर्ष का वैश्विक ऊर्जा बाजार पर गहरा असर दिख रहा है। ईरान से जुड़े युद्ध के 50 दिनों में खाड़ी देशों में करीब 50 अरब डॉलर (लगभग 4.63 लाख करोड़ रुपए) मूल्य का कच्चा तेल उत्पादन प्रभावित हुआ है।
50 करोड़ बैरल तेल बाजार से बाहर
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषण एजेंसी केप्लर के अनुसार, संघर्ष शुरू होने के बाद से 50 करोड़ बैरल से अधिक तेल और गैस वैश्विक बाजार से बाहर हो चुके हैं। इसे आधुनिक दौर का सबसे बड़ा ऊर्जा आपूर्ति संकट माना जा रहा है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी असर
विश्लेषकों का कहना है कि इतनी मात्रा में तेल की कमी का असर व्यापक है।
वैश्विक विमानन सेवा 10 सप्ताह तक प्रभावित हो सकती है।
दुनिया भर में वाहनों का संचालन 11 दिन तक ठप पड़ सकता है।
वैश्विक अर्थव्यवस्था में 5 दिन तक ईंधन आपूर्ति रुक सकती है।
अमेरिका की एक महीने की जरूरत के बराबर।
रिपोट्र्स के अनुसार, यह नुकसान संयुक्त राज्य अमेरिका की एक महीने की कुल तेल खपत के बराबर है।
खाड़ी देशों में उत्पादन पर असर
संघर्ष के चलते सऊदी अरब, कतर, यूएई, कुवैत, बहरीन और ओमान जैसे देशों में रोजाना करीब 80 लाख बैरल उत्पादन घटा है। यह मात्रा बड़ी तेल कंपनियों की संयुक्त क्षमता के बराबर मानी जा रही है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर अनिश्चितता
हालांकि ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की घोषणा की थी, लेकिन आपूर्ति और उत्पादन सामान्य होने में लंबा समय लग सकता है।
सामान्य स्थिति में लौटने में लगेंगे साल
विशेषज्ञों के अनुसार, कुवैत और इराक में उत्पादन सामान्य होने में 4-5 महीने लग सकते हैं, जबकि कतर की रिफाइनिंग क्षमता पूरी तरह बहाल होने में वर्षों का समय लग सकता है।
वैश्विक बाजार में अनिश्चितता कायम
डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध जल्द खत्म होने की उम्मीद जताई है, लेकिन अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो तेल की कीमतों में भारी उछाल और वैश्विक आर्थिक अस्थिरता देखने को मिल सकती है।
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