सातवें दीक्षांत समारोह में सुधा मूर्ति सम्मानित
313 विद्यार्थियों को मिली उपाधियां
धारवाड़. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) धारवाड़ के सातवें दीक्षांत समारोह में पहली बार मानद डॉक्टरेट (ऑनरेरी डॉक्टरेट) प्रदान की गई। पद्मभूषण से सम्मानित प्रख्यात लेखिका एवं समाजसेवी सुधा मूर्ति को यह सम्मान देकर संस्थान ने अपनी गौरवशाली परंपरा में नया अध्याय जोड़ा।
नवाचार और राष्ट्र निर्माण का आह्वान
मुख्य अतिथि आइआइटी दिल्ली के प्रोफेसर भीम सिंह ने विद्यार्थियों से कहा कि केवल डिग्री प्राप्त करना ही लक्ष्य नहीं होना चाहिए, बल्कि ज्ञान और नई तकनीकों के माध्यम से समाज तथा राष्ट्र के विकास में योगदान देना अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नवीकरणीय ऊर्जा और डिजिटल तकनीक जैसे क्षेत्रों में नवाचार को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए युवाओं से रोजगार खोजने के बजाय रोजगार सृजित करने वाला बनने का आह्वान किया।
सुधा मूर्ति ने दिया सफलता का मंत्र
मानद डॉक्टरेट ग्रहण करने के बाद सुधा मूर्ति ने कहा कि जीवन में कोई भी उपलब्धि स्थायी नहीं होती। उन्होंने विद्यार्थियों को कठिन परिश्रम, ईमानदारी और अपने कार्य के प्रति समर्पण को सफलता का आधार बताते हुए कहा कि असफलता जीवन का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन निरंतर प्रयास ही व्यक्ति को आगे बढ़ाता है।
313 विद्यार्थियों को उपाधियां, मेधावियों का सम्मान
समारोह में कुल 313 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की उपाधियां प्रदान की गईं। कंप्यूटर साइंस एवं इंजीनियरिंग के छात्र अमोघ आर. को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए राष्ट्रपति स्वर्ण पदक, जबकि सिद्धार्थ सिंह को निदेशक स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। समारोह की अध्यक्षता आइआइटी धारवाड़ के बोर्ड अध्यक्ष शरद कुमार सर्राफ ने की तथा संस्थान के निदेशक प्रो. वेंकप्पय्या आर. देसाई ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
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