ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता की अंतिम संस्कार में देरीअयातुल्ला अली खामेनेई

हमले में मारे गए अली खामेनेई के अंतिम संस्कार पर संकट; भीड़ और हमले का खतरा

तेहरान: ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के कई सप्ताह बाद भी उनका अंतिम संस्कार नहीं हो सका है। फरवरी में अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए संयुक्त हमले में खामेनेई की मौत हो गई थी, जिसके बाद पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई थी।

इस हमले ने ईरान में अमेरिका और इजराइल के खिलाफ प्रतिशोध की भावना को भी तेज कर दिया। हालांकि, सात सप्ताह बीत जाने के बावजूद अंतिम संस्कार न होना कई सवाल खड़े कर रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतिम संस्कार आयोजित किया जाता है, तो लाखों लोग श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्र हो सकते हैं। इतनी बड़ी भीड़ सुरक्षा के लिहाज से गंभीर खतरा बन सकती है, खासकर ऐसे समय में जब क्षेत्र में तनाव अभी भी बना हुआ है। आशंका है कि बड़ी सभा इजराइल के संभावित हवाई हमलों का निशाना बन सकती है।

हमले के बाद मोज्तबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया है, लेकिन वे अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। इससे देश के भीतर राजनीतिक अस्थिरता और संभावित असंतोष की अटकलें भी तेज हो गई हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, ईरान सरकार न केवल बाहरी खतरों से चिंतित है, बल्कि आंतरिक असंतोष और राष्ट्रवादी विरोध की संभावना से भी सतर्क है। इसी कारण अंतिम संस्कार जैसे बड़े सार्वजनिक आयोजन को टालने का निर्णय लिया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार अब अंतिम संस्कार के लिए मशहद शहर पर विचार कर रही है, जो देश के उत्तर-पूर्व में स्थित है और अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। यह खामेनेई का जन्मस्थान भी है, जिससे इसे प्रतीकात्मक महत्व भी मिलता है।

गौरतलब है कि 1989 में रुहोल्लाह खुमैनी के निधन पर लाखों लोगों की मौजूदगी में भव्य अंतिम संस्कार हुआ था। इसके विपरीत, वर्तमान हालात में इतने बड़े आयोजन का न हो पाना क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा चुनौतियों को दर्शाता है।

 

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