बिजली दर बढ़ोतरी के बावजूद वित्तीय संकट बरकरार
सरकारी विभागों पर भी हजारों करोड़ बकाया
शिवमोग्गा. कर्नाटक में बिजली वितरण कंपनियों (एस्कॉम) की वित्तीय स्थिति लगातार चिंताजनक होती जा रही है। राज्य की सभी एस्कॉम कंपनियों पर कुल कर्ज फरवरी के अंत तक 43 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गया है। बढ़ते घाटे को कम करने के लिए कर्नाटक विद्युत नियामक आयोग ने 1 अप्रेल से बिजली दरों में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है।
‘गृह ज्योति’ योजना से राहत, घाटे में कंपनियां
राज्य सरकार की गृह ज्योति योजना के तहत उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली दी जा रही है, जिससे आम लोगों को राहत मिली है। हालांकि, इस योजना के लिए अगस्त 2023 से मार्च 2026 तक सरकार ने 25,076 करोड़ रुपए का सब्सिडी भुगतान किया है, फिर भी एस्कॉम का घाटा कम नहीं हो पाया है।
सबसे अधिक कर्ज बेस्कॉम पर
कुल कर्ज में अकेले बेस्कॉम पर करीब 18 हजार करोड़ रुपए का बोझ है। जरूरत से ज्यादा बिजली खरीद, बुनियादी ढांचे के लिए लिए गए ऋण और समय पर भुगतान न करने से ब्याज बढ़ता जा रहा है, जिससे कर्ज और बढ़ रहा है।
सरकारी विभागों पर 12,500 करोड़ बकाया
स्थिति को और गंभीर बनाते हुए, राज्य के विभिन्न सरकारी विभागों पर एस्कॉम का करीब 12,500 करोड़ रुपए बकाया है। इसमें शहरी विकास विभाग पर 3,923 करोड़, ग्रामीण विकास विभाग पर 5,626 करोड़ और अन्य विभागों पर 2,913 करोड़ रुपए बकाया हैं।
केपीसीएल को भी भुगतान लंबित
बिजली उत्पादन करने वाली कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड को भी एस्कॉम द्वारा 8,755 करोड़ रुपए का भुगतान लंबित है। इसमें लेट पेमेंट सरचार्ज (एलपीएस) ही 5,277 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।
बढ़ते कर्ज और बकाया भुगतान के बीच एस्कॉम की वित्तीय स्थिति को स्थिर करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
सरकार दे रही नियमित सहायता
ऊर्जा मंत्री के.जे. जॉर्ज ने कहा कि एस्कॉम सरकारी उपक्रम हैं, इसलिए लाभ-हानि से अधिक उनकी सेवा महत्वपूर्ण है। सरकार समय-समय पर सब्सिडी और वित्तीय सहायता जारी कर रही है, ताकि इन कंपनियों की स्थिति सुधारी जा सके।
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