तेज गर्मी में ‘गरीबों का फ्रिज’ बना सहाराइलकल शहर के गांधी चौक में मिट्टी के मटकों की बिक्री करते हुए महिला।

मटकों की बिक्री में उछाल

40 डिग्री पार तापमान

बिजली कटौती से अमीर-गरीब सभी कर रहे खरीदारी

इलकल (बागलकोट). शहर में बढ़ती गर्मी और चिलचिलाती धूप के बीच मिट्टी के मटकों, सुराहियों और बोतलों की मांग अचानक बढ़ गई है। तापमान 40 डिग्री के आसपास पहुंचने से लोगों को तपिश महसूस हो रही है, जिससे आमजन बेहाल हैं।

प्यास बुझाने का देसी उपाय

भीषण गर्मी में सादा पानी भी पर्याप्त ठंडक नहीं दे पा रहा, ऐसे में लोग मिट्टी के मटकों में रखा प्राकृतिक रूप से ठंडा पानी पीना अधिक पसंद कर रहे हैं। मटकों का पानी न केवल ठंडा होता है, बल्कि शरीर को राहत भी देता है।

गांधी चौक बना मटकों का बाजार

शहर के गांधी चौक में सुबह से ही मटके बेचने वाले अपनी दुकानें सजा लेते हैं। तेज धूप के बावजूद विक्रेता दिनभर मटकों की बिक्री में जुटे रहते हैं। ग्राहक मोलभाव जरूर करते हैं, लेकिन अंतत: खरीदारी कर ही लेते हैं।

बिजली कटौती से बढ़ी मांग

इन दिनों बार-बार हो रही बिजली कटौती के कारण सिर्फ गरीब ही नहीं, बल्कि संपन्न वर्ग के लोग भी मिट्टी के मटके और सुराही खरीदने लगे हैं। इलेक्ट्रॉनिक साधनों के बजाय यह पारंपरिक विकल्प अधिक उपयोगी साबित हो रहा है।

थोड़ी महंगाई, फिर भी अच्छी बिक्री

मटकों के दाम में हल्की बढ़ोतरी के बावजूद बिक्री पर कोई असर नहीं पड़ा है। कई ग्राहक धूप में बैठे विक्रेताओं की स्थिति देखकर बिना मोलभाव के ही खरीदारी कर रहे हैं।

तेज गर्मी के इस दौर में ‘गरीबों का फ्रिज’ कहे जाने वाले मिट्टी के मटके एक बार फिर लोगों के लिए राहत का प्रमुख साधन बनकर उभरे हैं।

 

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By Bharat Ki Awaz

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