पांच साल से कागजों में राष्ट्रीय राजमार्ग, गड्ढों में तब्दील सडक़ पर सफरगुलदगुड्डा-पट्टदकल मार्ग पर बने गड्ढे।

राष्ट्रीय राजमार्ग-367 का सर्वे तक अधूरा

गुलदगुड्डा-पट्टदकल मार्ग पर वाहन चलाना जोखिम भरा, दो महीने में मरम्मत शुरू करने का आश्वासन

गुलेदगुड्डा (बागलकोट)। राष्ट्रीय राजमार्ग बनने की उम्मीद में पुरानी सडक़ की मरम्मत भी नहीं हुई और अब यही रास्ता लोगों के लिए मुसीबत बन गया है।

शिरूर क्रॉस से बुदिनगड, गुलेदगुड्डा, आसंगी, लायदगुंदी, नागराल और पट्टदकल होते हुए बानापुर तक राष्ट्रीय राजमार्ग-367 बनाने की योजना को पांच-छह साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक पूरा सर्वेक्षण भी शुरू नहीं हुआ। दूसरी ओर, गुलदगुड्डा-पट्टदकल मार्ग गड्ढों से भर गया है। कई जगह डामर उखड़ चुका है और नागराल एस.पी. गांव से पट्टदकल तक सडक़ की हालत इतनी खराब है कि बसों और दूसरे वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हो रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सडक़ किनारे गद्दनकेरी-बानापुर राष्ट्रीय राजमार्ग-367 का बोर्ड लगा दिया गया है, लेकिन धरातल पर निर्माण की दिशा में कोई ठोस काम दिखाई नहीं देता। वाहन चालकों को पट्टदकल से गुलदगुड्डा पहुंचने में भारी परेशानी होती है। गड्ढों से बचने की कोशिश में दुर्घटना का खतरा बना रहता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, तेज गति से गुजरने वाले कई दोपहिया वाहन चालक संतुलन खोकर गिर चुके हैं।

राजमार्ग की प्रतीक्षा में मरम्मत भी ठप

नागराल एस.पी. गांव के बुजुर्ग लेंकेप्पा हिरेकरुबर, गोपाल जक्कप्पनवर और मल्लप्पा हिरेद्यावप्पनवर ने मांग की कि सरकार राजमार्ग निर्माण में देरी कर रही है तो कम से कम मौजूदा सडक़ की तत्काल मरम्मत कराए। उनका कहना है कि गड्ढों से भरी सडक़ पर यात्रा करना मुश्किल हो गया है और लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि करीब दस साल पहले लोक निर्माण विभाग ने सडक़ राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को सौंप दी थी। लेकिन राजमार्ग का निर्माण शुरू होने तक सडक़ को अच्छी स्थिति में बनाए रखने की जिम्मेदारी को लेकर विभागों के बीच उदासीनता दिखाई दे रही है। इसका खामियाजा रोजाना इस मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों और वाहन चालकों को भुगतना पड़ रहा है।

दो महीने में मरम्मत शुरू करने का भरोसा

हुनगुंद खंड के राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अभियंता गोपाल गेन्नूर ने बताया कि सडक़ की मरम्मत कर डामर की सतह सुधारने का काम दो महीने के भीतर शुरू किया जाएगा। इसके बाद सर्वेक्षण के अनुसार निजी भूमि और वन भूमि से संबंधित प्रक्रिया पूरी कर राजमार्ग निर्माण शुरू किया जाएगा।

विधायक भीमसेन चिम्मनकट्टी ने कहा कि उन्होंने स्वयं सडक़ की बदहाली देखी है। क्षेत्र के लोगों को हो रही परेशानी को देखते हुए मरम्मत की योजना बनाई गई है।

फिलहाल क्षेत्रवासियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब राष्ट्रीय राजमार्ग का निर्माण वर्षों से अटका है, तो मौजूदा सडक़ को सुरक्षित और चलने योग्य बनाए रखने में इतनी देर क्यों हुई। लोगों को अब घोषणा नहीं, गड्ढों से राहत देने वाला ठोस काम चाहिए।

 

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By Bharat Ki Awaz

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